बचपन में आई साधु बनने गए हरिद्वार, फिर अनंत सिंह कैसे बने बाहुबली?

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पटना ।साधु बनने के लिए 9 साल की उम्र में घर छोड़ने वाले अनंत सिंह का मोह भंग होने पर वे गांव लौटे. बड़े भाई बिराची सिंह की हत्या से आहत होकर उन्होंने पुलिस के न्याय का इंतजार न किया. बदले की धुन में उन्होंने नदी तैरकर भाई के माओवादी हत्यारे को पत्थर से कुचल दिया. यही प्रतिशोध उन्हें बाहुबली की राह पर ले गया.

बिहार की राजनीति में बाहुबली के तौर पर पहचान बनाने वाले पूर्व विधायक अनंत सिंह का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. एक समय ऐसा था जब उनका मन दुनियादारी से हटकर पूजा-पाठ में लगता था, लेकिन एक घटना ने उन्हें वैराग्य से हिंसा के रास्ते पर ला खड़ा किया.

5 जनवरी, 1967 को पटना जिले के बाढ़ कस्बे के पास नदवां गांव में जन्मे अनंत सिंह चार भाइयों में सबसे छोटे थे. उनका मन बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगता था, इसलिए चौथी कक्षा के बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया. उनका झुकाव धर्म और आध्यात्मिकता की ओर था, जिसके चलते मात्र 9 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह हरिद्वार चले गए और साधुओं के बीच रहकर उनकी सेवा और पूजा-पाठ में लीन रहने लगे.

लेकिन वैराग्य का यह मोह जल्द ही भंग हो गया. एक दिन साधुओं के बीच हुए हिंसक झगड़े को देखकर अनंत दंग रह गए. उन्हें लगा कि जहां वैराग्य है, वहां भी हिंसा और कलह है. इस घटना से निराश होकर उन्होंने संन्यासी जीवन त्याग दिया और वापस अपने गांव लौट आए.

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