बिहार गए तो बिहार भी गया हाथ से

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कहावत है कि जहं जहं पांव पड़े संतन के तहं तहं बंटाधार। कुछ लोगों पर यह कहावत पूरा फिट बैठता है। ये ऐसे लोग होते हैं जिनको कहीं भेजा तो इस विश्वास के साथ जाता है कि यह अनुभवी है, चुनाव जिताने वाले हैं। अपने राज्य में पंचायत से लेकर विधानसभा चुनाव जिता चुके हैं,चुनाव कैसे जीता जाता हैं जानते हैं। इनको जिस राज्य में चुनाव जिताने भेजा जाएगा यह पार्टी को चुनाव जिता देंगे लेकिन यह आलाकमान के विश्वास की कसौटी पर खरा नहीं उतरते हैं।ये जहां भी चुनाव भेजे जाते हैं वहां पार्टी चुनाव हार जाती है। छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के एक नेताजी को आलाकमान ने वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाकर बिहार भेजा तो गया था चुनाव जिताने के लिए लेकिन यह नेता बिहार गए तो बिहार में भी पार्टी चुनाव हारी तो हारी जिस गठबंधन में पार्टी थी, वह गठबंधन भी बुरी तरह हार गया।

ऐसा नहीं है कि नेता जी को बिहार भेजा गया चुनाव जिताने के लिए और वह कांग्रेस को पहली बार बिहार में चुनाव नहीं जिता सके। इससे पहले नेताजी का आलाकमान ने असम भेजा चुनाव जिताने तो कांग्रेस असम में चुनाव हार गई, यूपी भेजा तो यूपी में कांग्रेस चुनाव हार गई।अब बिहार चुनाव जिताने के लिए भेजा गया तो कांग्रेस बिहार में भी चुनाव बुरी तरह हार गई है.नेता का पार्टी को चुनाव नहीं जिता पाने का रिकार्ड बिहार में भी कायम है।अब तो लोग भी कहने लगे हैं कि जब नेताजी का रिकार्ड पार्टी को चुनाव जिताने के नहीं है तो आलाकमान उनको हर जगह उनको जिताने के लिए भेजता क्यों है।छत्तीसगढ़ में लोकसभा के बाद विधानसभा का चुनाव भी हारने के बाद तो आलाकमान को समझ जाना चाहिए कि अब यह नेता चुनाव जिताने वाला नेता नहीं रहा।

बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक जीत पर राज्य में भाजपा की सरकार से लेकर, संगठन के नेता भी गदगद् हैं। ऐसे में पूर्व सीएम रमन सिंह ने सच कहा है, कड़वा सच कहा है कि कांग्रेस के राहुल गांधी व भूपेश बघेल की जोड़ी अद्भुत है। ये दोनों जहां जहां भी जाते हैं बाकी बचा हुए खत्म कर देते हैं।ये सफर असम से शुरू हुआ है.इन्हें जहां भी भेजा जाता है,कांग्रेस का सफाया हो जाता है। दोनों बिहार गए और बिहार में भी कांग्रेस हार गई, बुरी तरह हार गई। चुनाव कांग्रेस ने बिहार में ६१ सीटों पर लड़ा और मात्र ६ सीट ही जीत पाई। रमन सिंह का कहना है कि दोनों भाजपा के लिए बहुत शुभ हैं। यह बात सही भी है जब भाजपा जीतती है बहुत से लोग कहते हैं कि इसका कुछ श्रेय तो राहुल गांधी को भी जाता है। कई भाजपा नेता तो कहते हैं कि जब तक राहुल गांधी हैं हमको हार को कोई डर नहीं है।

पार्टी जीतती है तो पार्टी के वह सब बहुत खुश होते हैं और शान से बताते हैं कि उनको जितने विधानसभा में पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी दी थी, वहां तो सभी सीटें भाजपा जीती है,गठबंधन जीता है।छत्तीसगढ़ भाजपा के नेताओं की टीम को बिहार में २५ सीटों पर गठबंधन को जिताने का काम सौंपा था, बिहार में एनडीए की जीत के बाद राज्य लौटी टीम में शामिल लोगों ने बताया कि हमारी टीम ने २३ सीटों पर गठबंधन को जिताने का काम किया और उसमें टीम सफल रही है।भूपेश बघेल की पार्टी बिहार चुनाव में बुरी तरह हारी उनके पास जीत के बारे में बताने को कुछ नहीं था तो उन्होंने यह बताया कि हम हारे नहीं है, हमको तो चुनाव आयोग ने हराया है।यह राहुल गांधी का नारा है, हर बार हारने पर यही नारा लगाते हैं, हम हारे नहीं है, हम को चुनाव आयोग ने गड़बड़ी कर हराया है।

बिहार चुनाव हारने के बाद मीडिया बता रहा है कि यह राहुल गांधी की ९५ वीं हार है। इसी तरह वह और पांच चुनाव हार जाते हैं तो वह चुनाव में हारने की सेंचुरी लगाने वाले कांग्रेस व देश के एकमात्र कांग्रेस नेता होंगे। राहुल गांधी इस मायने में अद्भुत नेता हैं कि उनकी जगह कोई और नेता होता तो दस बीस चुनाव हारने पर दूसरे को पार्टी को चुनाव जिताने का मौका देता। राहुल गांधी और उनके समर्थकों को पूरा विश्वास है कि एक दिन वह चुनाव जरूर जीतेंगे। वह दिन अभी तक यानी कई बरस हो गए हैं नहीं आया है।लेकिन कभी तो आएगा। मोदी एक दिन कभी तो रिटायर होंगे और उसके बाद तो राहुल गांधी जरूर चुनाव जीतेंगे। कहा जाता है न कोशिश करने वालों की हार नहीं होती,राहुल गांधी अभी कोशिश कर रहेहैं, निरतंर कोशिश कर रहे हैं। बिहार में भी उन्होंने कोशिश की।

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