
ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया संकट पर भारत का स्पष्ट रुख, जयशंकर बोले- दो-राष्ट्र समाधान ही स्थायी रास्ता
नई दिल्ली, 15 मई 2026 – नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में इजराइल-फलस्तीन संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के लिए “दो-राष्ट्र समाधान” का समर्थन करता है और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जरूरी मानता है।
बैठक के दौरान जयशंकर ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव, समुद्री मार्गों पर खतरा और ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुई स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
विदेश मंत्री ने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन देशों में जारी संघर्ष और अस्थिरता मानवीय संकट को और गंभीर बना रही है। जयशंकर ने कहा कि शांति और स्थिरता को टुकड़ों में हासिल नहीं किया जा सकता और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग व निरंतर संवाद बेहद जरूरी है।
उन्होंने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने की अपील की। भारत ने तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने वाली सभी सकारात्मक पहलों का समर्थन करने की बात भी दोहराई।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। ब्रिक्स बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा नए सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी बैठक में हिस्सा लिया और अमेरिका व इजराइल की नीतियों की आलोचना करते हुए ब्रिक्स देशों से संयुक्त प्रतिक्रिया की मांग की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स मंच पर भारत का संतुलित और कूटनीतिक रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
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