
रायपुर गरियाबंद जिले के केरावाहारा गांव में पिछले एक महीने से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के लगाए गए पिंजरे में सुरक्षित पकड़ लिया गया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष टल गया और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
वन विभाग के अनुसार, तेंदुआ लगातार रिहायशी इलाके, स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा रहा था। इसके अलावा उसने कई पालतू मवेशियों पर भी हमला किया था, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। स्थिति को देखते हुए विभाग ने इलाके में विशेष निगरानी शुरू की और रणनीतिक स्थानों पर केज ट्रैप (पिंजरे) लगाए।
वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन और वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. राकेश वर्मा के मार्गदर्शन में चलाए गए अभियान के तहत प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को भी मौके पर तैनात किया गया था। विभाग को इस कार्रवाई के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक कार्यालय से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त थी।
सुनियोजित रणनीति के तहत शुक्रवार सुबह तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद हो गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए को सुरक्षित कब्जे में लिया और उसके स्वास्थ्य व व्यवहार की निगरानी शुरू कर दी। एहतियात के तौर पर आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी की गई, ताकि भीड़ न जुटे।
वन विभाग ने बताया कि तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि उसे उपचार की जरूरत है या फिर प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सकता है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेंदुए या किसी अन्य वन्यजीव की गतिविधि दिखने पर अफवाह फैलाने के बजाय तुरंत वन अमले को सूचना दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन और वन्यजीवों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

















