जापान 20 अक्टूबर को लॉन्च करेगा मंगल के चंद्रमा फोबोस से नमूने लाने वाला अंतरिक्ष मिशन

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पांच साल तक चलेगा मिशन, फोबोस और डीमोस की उत्पत्ति के साथ सौर मंडल में जीवन की शुरुआत से जुड़े रहस्यों को समझने में मिलेगी मदद


टोक्यो। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी 20 अक्टूबर 2026 को एक महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इस मिशन का उद्देश्य मंगल ग्रह के दो छोटे चंद्रमाओं में से एक फोबोस से नमूने एकत्र कर पृथ्वी पर लाना है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि करीब पांच साल तक चलने वाला यह मिशन फोबोस और उसके साथी चंद्रमा डीमोस की उत्पत्ति तथा सौर मंडल में जीवन की शुरुआत से जुड़े सवालों के जवाब खोजने में मदद करेगा।

H-3 रॉकेट से होगा प्रक्षेपण

जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) इस अंतरिक्ष यान को अपने नए मुख्य रॉकेट H-3 के जरिए तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से लॉन्च करेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रक्षेपण 20 अक्टूबर को भारतीय समयानुसार सुबह 1 बजकर 11 मिनट पर होना है।

मंगल के चंद्रमाओं का अन्वेषण प्रोजेक्ट के मैनेजर यासुहिरो कावाकात्सु के अनुसार, फोबोस से प्राप्त नमूने वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध करा सकते हैं। इनसे मंगल के चंद्रमाओं की संरचना, निर्माण और विकास की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

भविष्य के मानव मिशनों के लिए भी अहम

मिशन से मिलने वाली जानकारी भविष्य में मंगल ग्रह के आसपास मानव अभियानों की योजना बनाने में भी उपयोगी हो सकती है। वैज्ञानिक फोबोस को संभावित रूप से भविष्य के मानव मिशनों के लिए एक आधार के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय परियोजना का नेतृत्व जापान कर रहा है। इसमें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा सहित अन्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां उपकरण और संचार संबंधी सहयोग दे रही हैं।

फोबोस और डीमोस अब भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य

1960 के दशक से मंगल ग्रह की खोज के लिए दर्जनों अंतरिक्ष मिशन भेजे जा चुके हैं, लेकिन उसके दोनों चंद्रमाओं फोबोस और डीमोस के बारे में अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं। इनके निर्माण और उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अलग-अलग संभावनाओं पर अध्ययन जारी है।

फोबोस और डीमोस के नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं से लिए गए हैं। ये युद्ध के देवता एरेस के पुत्र माने जाते हैं और इनके नाम क्रमशः भय तथा आतंक से जुड़े हैं। जापान का यह मिशन इन दोनों चंद्रमाओं के रहस्यों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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