महापुरुषों का अपमान समाज को बुरा तो लगेगा ही

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सच यह है कि महापुरुष तो पूरे मानव समाज का होता है, यानी हर समाज का होता है, पूरे राज्य का होता है, पूरे देश का होता है। उसे किसी समाज या राज्य के दायरे में नहीं रखना चाहिए, यह नहीं मानना चाहिए कि वह हमारे समाज का ही है। महापुुरुष भले ही किसी परिवार व समाज में पैदा होते हैं लेकिन काम तो वह पूरे मानव समाज के हित में करते हैं। इसलिए वह सभी के लिए महापुरुष होने चाहिए। सभी को उनको महापुरुष मानना चाहिए। उनका अपमान किसी भी तरह से नहीं करना चाहिए।कोई अपमान करता है तो सभी लोगों को उसका विरोध करना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि समाज विशेष के लोग ही इस बात का विरोध करें और बाकी समाज के लोग मूकदर्शक बने रहे।

हर राज्य में कई समाज के लोग होते हैं।हर समाज में दूसरे समाज से अपने समाज को जोड़ने व दूसरे समाज से खुद को तोड़ने वाले लोग भी होते हैं।समाज को जोड़ने वाले जो लोग होते हैं, वह दूसरे समाज से अपने समाज को जोड़ते हैं। दूसरे समाज के लोगों का सम्मान करते हैं, उनके तीज त्यौहार में उनसे मिलते है, उनको शुभकामनाएं देते हैं, उनके जुलूस,रैली का स्वागत करते हैं।उनके महापुरुषों का सम्मान करते हैं। समाज जब दूसरे समाज का सम्मान करता है तो दोनों समाज के बीच अच्छे संबंध बनते है, दोनों समाज के लोग एक दूसरे का सम्मान करते हैं, एक दूसरे के महापुरुषों का सम्मान करते हैं। सम्मान करने से सम्मान मिलता है राज्य में सद्भाव बना रहता है।

सभी समाजों मे समाज जोड़ने वाले लोगों के अलावा समाज को तोड़ने वाले लोग भी होते हैं। ऐसे लोग जब समाज में प्रभावी हो जाते हैं, वह संगठन बना लेते हैं तो इसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है, थोड़े से तोड़ने वाले लोगों को कारण माना जाता है कि पूरा समाज ही ऐसा है,हकीकत मे सब समाज में जोड़ने वाले ज्यादा होते है और तोड़ने वाले कम होते हैं, इसलिए समाज के बहुसंख्यक लोगों की यह जिम्मेदारी होती है कि वह समाज को तोड़ने वाले लोग कुछ गलत करते हैं तो उनको खुल कर कहें कि आप लोग यह काम गलत कर रहे हो। इससे पूरे समाज की इमेज खराब होती है,समाज की बदनामी होती है।कई बार ऐसा होता है कि समाज को जोड़ने वाले लोग चुप रह जाते हैं तो समाज के तोड़ने वालों को लगता है कि उन्होंने जो किया है सही किया है जो कहा है सही कहा है।

हाल ही में तेलीबांधा में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा किसी मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति ने तोड़ दी तो सभी लोगों ने इसकी निंदा की,सबने इसे गलत कहा, सबने इसे छत्तीसगढ़ का अपमान कहा।सबने इसे गंभीरता से लिया, सभी लोगों गलत हुआ तो गलत कहा।यह राज्य के सम्मान जुडा़ हुआ मामला था तो सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और २४ घंटे के अंदर दोषी व्यक्ति को गिरप्तार करने के साथ ही छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा वहीं पर स्थापित कर दी।इस मामले को लेकर भी राजनीति करने वालों ने राज्य के लोगों को दो भागों में बांटने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहे, राज्य के लोग इस मामले में एकजुट रहे। इसी तरह राज्य के लोगों को किसी भी समाज या समाजों के महापुरुषों का कोई संगठन या किसी संगठन का नेता करता है तो राज्य के लोगों को इसे मुखर होकर कहना चाहिए कि ऐसा जिसने भी किया है, गलत किया है. सभी राजनीतिक दलों व सभी संगठनों के लोगों को गलत करने वालो से कहना चाहिए कि आपने महापुरुषों का अपमान कर गलत किया है।गलती करने वाले को सब लोग जब गलती करने का एहसास कराते हैं तो उसको पता चलता है कि उससे गलती हो गई है।

एक तो गलती का एहसास सभी लोगों को कहकर कराना चाहिए। ऐसा नहीं होता है तो दूसरा रास्ता यह बचता है कि जिन समाज के महापुरुषों का अपमान किया गया है,वह कानून के रास्ते गलत कहने व करने वाले को सजा दिलाए।इसके लिए गलत कहने वाला व्यक्ति के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराना चाहिए और उसे सजा दिलाने का प्रयास करना चाहिए ताकि उसे एहसास हो कि उसने जो किया था, वह गलत था, वह अपराध था।महापुरुषों का अपमान किया जाए को समाज के लोगों को बुरा तो लगेगा ही।इससे समाजों के बीच दूरी बढ़ती है, दूसरे समाज भी आपके महापुरुषों का अपमान करेंगे। इससे समाज में सद्भभाव बिगड़ेगा। जब समाज में सद्भाव नहीं रहता है, राज्य में सद्भाव नहीं रहता है तो उसका खामियाजा सभी समाज के लोगों को भुगतना पड़ता है। कुछ लोग चाहते हैं कि समाज में,राज्य में सद्भाव न रहे ऐसे लोगों से राज्य के सभी समाज व संगठन के लोगों को सावधान रहना चाहिए।

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