नेपाल में विद्रोह चरम पर: पीएम ओली ने दिया इस्तीफा

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काठमांडू । नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ देशभर में भड़के छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है।

विद्रोह से इस्तीफे तक की कहानी

बीते एक सप्ताह से नेपाल में भ्रष्टाचार और सरकारी नीतियों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा था। 8 सितंबर को सोशल मीडिया बैन के फैसले ने इस आंदोलन को और हवा दी। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए। राष्ट्रपति आवास पर कब्जा, नेपाली कांग्रेस मुख्यालय में आगजनी और पूर्व प्रधानमंत्रियों के घरों पर हमले तक की घटनाएँ सामने आईं।

हालात बिगड़ते देख प्रधानमंत्री ओली ने मंगलवार शाम अपने आवास पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। माना जा रहा है कि बैठक में सहयोगी दलों ने भी ओली पर दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।

तीन मंत्रियों ने पहले ही दिया था इस्तीफा

आंदोलन की आंच इतनी तेज थी कि गृह मंत्री समेत कैबिनेट के तीन मंत्रियों ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इससे सरकार पर और दबाव बढ़ गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ओली ने इस्तीफा देने से पहले दुबई में अस्थायी शरण लेने की भी कोशिश की थी।

आगे का रास्ता

अब नेपाल में राजनीतिक अनिश्चितता और गहरी हो गई है। राष्ट्रपति पौडेल जल्द ही अंतरिम सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों से राय-मशविरा करेंगे। विपक्षी दलों का कहना है कि भ्रष्टाचार पर सख्ती और युवाओं की मांगों को स्वीकार किए बिना स्थिति सामान्य नहीं होगी।

विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की मौजूदा स्थिति बांग्लादेश में हाल ही में हुए घटनाक्रम से मिलती-जुलती है, जहाँ छात्र आंदोलन ने सीधे सरकार का तख्तापलट करा दिया था। नेपाल में भी युवाओं की शक्ति ने यह साबित कर दिया कि जनता की अनदेखी करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

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