छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान के 15 दिवसीय संस्कृत महोत्सव का भव्य समापन

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संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण-संवर्धन का संदेश, विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र से किया गया सम्मानित

रायपुर

संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान द्वारा आयोजित पञ्चदशदिवसीय संस्कृत महोत्सव का गरिमामय समापन हुआ। 13 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक चले इस महोत्सव में संस्कृत भाषा, साहित्य, संस्कृति, योग, आयुर्वेद और भारतीय परंपराओं से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

महोत्सव का शुभारंभ पूज्य स्वामी निर्मल स्वरूपजी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ था। पंद्रह दिनों के दौरान ‘संस्कृते नवाचारः’, स्तुति प्रतियोगिता, संस्कृत शब्दभंडार कोश प्रतियोगिता, काशी शास्त्रार्थ परंपरा, गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर विशेष व्याख्यान, ध्येय-वाक्य प्रतियोगिता, संस्कृत शोभायात्रा, संस्कृत प्रश्नमञ्जरी, योग सत्र, बद्रीनाथ धाम विषयक व्याख्यान, संस्कृत रूपक और आयुर्वेद सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

महोत्सव में डीडी न्यूज नई दिल्ली के डॉ. नारायणदत्त मिश्र, शुभमय मुखर्जी, डॉ. ललित प्रधान, हेमंत मिश्र, अम्बरीश त्रिपाठी, शिवकुमार पाण्डेय, डॉ. अमित बन्दोलिया, प्रो. के. विश्वनाथन, वैद्य प्रशान्त मिश्र और हार्वर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका की शोधकर्त्री सुश्री राधा विलेंड्समैन सहित अनेक विद्वानों एवं विशेषज्ञों ने सहभागिता की। उन्होंने विभिन्न सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

संस्थान के अध्यक्ष नवीन शर्मा और सचिव डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि यह महोत्सव केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ने का सार्थक प्रयास रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का अवसर भी मिलता है।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि आचार्य शिव शंकर मिश्र, कुलपति पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन तथा विशिष्ट अतिथि आचार्य सच्चिदानन्द शुक्ल, कुलपति पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और उत्कृष्ट प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह में संस्थान के संगठन सचिव आचार्य मुकेश चौबे, शिक्षा समिति के निदेशक डॉ. रूपेन्द्र कुमार तिवारी सहित विभिन्न जिला इकाइयों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में संस्कृत अनुरागी मौजूद रहे।

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