कई राजनीतिक दलों को लगता है कि जनता को ठगा जा सकता है लेकिन वह भूल जाते हैं कि जनता एक बार किसी पर भरोसा करती है, एक बार कोई राजनीतिक दल उसे ठग सकता है लेकिन कोई राजनीतिक दल यह समझता है कि वह जनता को बार बार ठग सकता है, जनता उसको हराकर उसका यह वहम दूर कर देती है।जनता इतनी तो समझदार हो गई है कि वह अब राजनीतिक दलों की बातें सुनकर समझ जाती है कि किसकी नीयत जनता की सेवा करने की है और किसकी नीयत सत्ता हासिल कर मेवा खाने की है। कई राज्यों के चुनाव में जनता ने ऐसे राजनीतिक दलों को चुनाव में हराकर सबक सिखाया है लेकिन हर चुनाव मे राजनीतिक दल भूल जाते हैं वह समझते हैं कि दूसरा राजनीतिक दल जनता को नहीं ठग सका लेकिन हम तो ठग सकते हैं।
छत्तीसगढ़,,राजस्थान, मप्र,दिल्ली,हरियाणा,महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं।इसमें दिल्ली ही ऐसा राज्य है जहां केजरीवाल की पार्टी सत्ता पर वापस नहीं आ सकी क्योंकि वह सोचती थी कि उसने दो बार जनता को ठग लिया है तो वह तीसरी बार ठग सकती है लेकिन उनके पांच साल में हुए भ्रष्टाचार के कारण जनता ने उनको फिर से सत्ता में लाने का फैसला नहीं किया।बहुत बड़े बड़े वादे किए लेकिन जनता समझ गई थी केजरीवाल की नीयत फिर सत्ता प्राप्त कर वही करना है जो वह पांच साल में किया है। इसलिए जनता ने इस बार भाजपा को मौका दिया। दिल्ली के अलावा छत्तीसगढ़,मप्र, राजस्थान, हरियाणा व महाराष्ट्र में जनता ने विधानसभा चुनाव में जो राजनीतिक दल सत्ता में था, उसे ही जनता ने फिर से सत्ता सौंपी दी।क्योंकि इन राज्यों में भाजपा की सरकारों ने जनता के हित में काम किया। भ्रष्टाचार नहीं किया। चुनाव में राजनीतिक दल जो घोषणापत्र जारी करते हैं सभाओं में जो बड़ी बड़ी घोषणाएं करते हैं, एक कोई घोषणा करता है तो दूसरा उससे बड़ी घोषणा करता है तो भी जनता समझ जाती है कि यह जो बढ़ चढ़कर घोषणा करने वाला है इसकी नीयत किसी भी तरह पहले सत्ता हासिल करना है, सत्ता मिल जाने के बाद वह घोषणाएं पूरी नहीं करेगा। कई राज्यों में जनता देख चुकी है कि चुनाव में तो बड़ी बड़ी घोषणाएं जीतने के लिए कर दी जाती है लेकिन जब पूरा करने का समय आता है तो कई राजनीतिक दल पूरा नहीं कर पाते हैं,तरह तरह के बहाने बनाते हैं। छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने शराबबंदी की घोषणा की थी लेकिन चुनाव के बाद पांच साल तक टालती रही। पांच साल बाद भी वह पूरा नहीं कर सकी।

इसी तरह मप्र,छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र में चुनाव हुए तो कांग्रेस ने किसानों व महिलाओं को चुनाव जीतने के लिए भाजपा से ज्यादा पैसा देने की घोषणा की लेकिन जनता ने कांग्रेस के वादे पर यकीन नहीं किया।छत्तीसगढ़ में वह देख चुकी थी कि कांग्रेस ने शराबबंदी का वादा कर शराबबंदी नहीं की,वहीं मप्र व महाराष्ट्र में महिलाओं को भाजपा सशक्त करने के लिए पैसा देने का वादा किया था और कांग्रेस ने महज चुनाव जीतने के लिए महिलाओं को भाजपा से ज्यादा पैसा देने का वादा किया तो महिलाओं ने कांग्रेस पर नहीं भाजपा पर भरोसा किया।
अब बिहार विधानसभा चुनाव में राजद वही कर रहा है, तेजस्वी यादव वही कर रहे है।उनको भी वही वहम है जो कई राज्यों में कांग्रेस को था कि जनता को ज्यादा से ज्यादा पैसा देने का वादा कर ठगा जा सकता है,उसको खरीदा जा सकता है।यही वजह है कि तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन जनता का वोट हासिल करने के लिए,चुनाव हर हाल मे जीतने के लिए कहा कि नीतीश कुमार महिलाओं को बारहों महीने में जितना देंगे, हम एक बार में ही उतना देंगे। नीतीश १२ बार मे आपको तीस हजार रुपए देंगे तो हम एक बार मे आपको तीस हजार रुपए देंगे वह भी चुनाव के बाद फलानी तारीख को दे देंगे। तेजस्वी भूल गए कि वह जो कर रहे है वह दूसरे दल दूसरे राज्यों में कर चुके है, जनता ऐसे दल को नहीं जिताती है जो चुनाव जीतने के लिए बड़ी बड़ी घोषणा करता है,वह तो उस दल को जिताती है जो उसके हित में काम करता आ रहा है, वह उसे नहीं जिताती है जो पैसे देने का वादा करता है,वह उसे जिताती है जो पैसा दे चुका है तथा आगे भी देता रहेगा
तेजस्वी से पहले राहुल गांधी भी इसी तरह का खेल लोकसभा चुनाव मे खेल कर देख चुके हैं। एक चुनाव में राहुल गांधी ने पीएम मोदी के साल के छह हजार किसान सम्मान निधि के जवाब में हर माह छह हजार रुपए का वादा किया था जनता ने पीएम मोदी के वादे पर यकीन किया, राहुल गांधी के वादे पर यकीन नहीं किया। इसी तरह पिछले चुनाव में राहुल गांधी जनता से हर माह साढ़े आठ हजार रुपए के हिसाब से एक साल में महिलाओं को लखपति बनाने का वादा किया। पूरे चुनाव में कहा कि खटाखट महिलाओं के खाते में पैसे आएंगे लेकिन महिलाओं ने राहुल गांधी के खटाखट लखपति बनाने के वादे पर यकीन नहीं किया। पीएम मोदी के इस वादे पर यकीन किया कि वह तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाएंगे क्योंकि पीएम मोदी लाखों महिलाओं को लखपति दीदी बना चुके हैं। चुनाव बड़े बड़े वादे करके नहीं जीते जा सकते चुनाव तब ही कोई राजनीतिक दल जीतता जब जनता उसके वादे पर यकीन करती है।
























