CGPSC-2021: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फ़ैसला, चयनित अभ्यर्थियों को तुरंत नियुक्ति देने के निर्देश
नई दिल्ली/रायपुर, 25 मार्च 2026 – छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC)-2021 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चल रहा क़ानूनी विवाद अब अपने अंत की ओर है। देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को बड़ा झटका देते हुए चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगाने संबंधी याचिका को ख़ारिज कर दिया है।
अदालत ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के पिछले फ़ैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चयनित उम्मीदवारों को अविलंब जॉइनिंग दी जाए।
हाई कोर्ट के आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट के फ़ैसले को पूरी तरह सही ठहराया और सरकार की एसएलपी (Special Leave Petition) को ख़ारिज कर दिया।
सरकार की दलील: सीबीआई जांच का हवाला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। सरकार की मुख्य दलील यह थी कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) जांच जारी है। उनका तर्क था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक नियुक्तियों को रोका जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों की दलील: न्याय में देरी
दूसरी ओर, चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट को बताया कि:
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सीबीआई इस मामले में पहले ही अपनी चार्जशीट दाख़िल कर चुकी है।
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हैरानी की बात यह है कि कुल 171 चयनित अभ्यर्थियों में से केवल 5 अभ्यर्थियों के नाम ही जांच के घेरे में आए हैं।
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यही नहीं, 171 में से 125 अभ्यर्थियों को सरकार पहले ही जॉइनिंग दे चुकी है।
अभ्यर्थियों के वकीलों ने तर्क दिया कि जब बहुमत को जॉइनिंग मिल चुकी है और जांच केवल कुछ ही लोगों तक सीमित है, तो बाकी योग्य उम्मीदवारों को लंबे समय तक रोके रखना पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
एक लंबी क़ानूनी लड़ाई का अंत
यह फ़ैसला एक लंबी और जटिल क़ानूनी प्रक्रिया के बाद आया है:
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सबसे पहले, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था।
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राज्य सरकार ने इस फ़ैसले को डिवीजन बेंच (खंडपीठ) में चुनौती दी, लेकिन वहां भी सरकार की अपील ख़ारिज कर दी गई।
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अंततः, हार मानकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाख़िल की थी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी ख़ारिज कर दिया है।
अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद उन अभ्यर्थियों ने चैन की सांस ली है, जो लंबे समय से परीक्षा पास करने के बावजूद नियुक्ति का इंतज़ार कर रहे थे। यह फ़ैसला न केवल उनके संघर्ष की जीत है, बल्कि राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता के प्रति युवाओं के विश्वास को भी बहाल करेगा।
अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि वह कितनी जल्दी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को जॉइनिंग लेटर जारी करती है।
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