भोपाल में एलपीजी सिलेंडर संकट छोटे कारोबारियों पर बढ़ता दबाव, राहत की कोशिशें जारी ?

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भोपाल में एलपीजी सिलेंडर संकट छोटे कारोबारियों पर बढ़ता दबाव, राहत की कोशिशें जारी ?
भोपाल में एलपीजी सिलेंडर संकट छोटे कारोबारियों पर बढ़ता दबाव, राहत की कोशिशें जारी ?

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों एलपीजी सिलेंडर की कमी से जूझ रही है। खासकर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी ने होटल, रेस्त्रां, ढाबों और छोटे खानपान व्यवसायों को गंभीर संकट में डाल दिया है। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या अभी भी बनी हुई है।

जिला खाद्य नियंत्रक सीएस जादौन के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति अब तय कोटा के अनुसार शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने पैनिक बुकिंग को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है, जिससे स्थिति कुछ हद तक स्थिर हुई है। लेकिन इसके बावजूद होटल और खानपान से जुड़े व्यवसायियों की परेशानियां खत्म नहीं हुई हैं। अब तक कलेक्टर कार्यालय में 1200 से अधिक आवेदन पहुंच चुके हैं, जिनमें कमर्शियल गैस सिलेंडर की मांग की गई है। शासन के आदेश के बाद होटल और रेस्त्रां के लिए कुल मांग का लगभग 9 प्रतिशत सिलेंडर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में करीब 750 सिलेंडर जारी किए गए हैं। हालांकि यह संख्या वास्तविक जरूरत की तुलना में काफी कम मानी जा रही है। कई होटल संचालकों का कहना है कि सीमित आपूर्ति के कारण उन्हें अपने व्यवसाय को सीमित करना पड़ रहा है या फिर अस्थायी रूप से बंद करना पड़ रहा है।

भोपाल में एलपीजी सिलेंडर संकट छोटे कारोबारियों पर बढ़ता दबाव, राहत की कोशिशें जारी ?
भोपाल में एलपीजी सिलेंडर संकट छोटे कारोबारियों पर बढ़ता दबाव, राहत की कोशिशें जारी ?

इस संकट के दौरान निजी गैस कंपनियों की भूमिका भी चर्चा में रही है। जिले की चार निजी कंपनियों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी। पहले जहां एजेंट्स को सिलेंडर लगभग 1600 रुपए में मिलते थे, वहीं अब कीमत बढ़ाकर 2300 रुपए कर दी गई। इसके बाद एजेंट्स ने इन सिलेंडरों को 3500 से 4000 रुपए तक में बेचा। इस महंगाई का सीधा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ा, जो पहले से ही सीमित मुनाफे पर काम कर रहे थे।

होटल, रेस्त्रां और हॉस्टल जैसे संस्थानों में निजी कंपनियों के सिलेंडर की खपत तेजी से बढ़ी, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण यह सभी के लिए संभव नहीं था। नतीजतन, कई छोटे कारोबारियों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 300 से अधिक छोटे खानपान स्टॉल बंद हो चुके हैं। कोलार के कटियार मार्केट, नेहरू नगर, करोद और आसपास के इलाकों में यह समस्या अधिक देखने को मिली है।

छोटे दुकानदारों का कहना है कि वे महंगे सिलेंडर खरीदकर अपना व्यवसाय नहीं चला सकते। उनकी आय सीमित होती है और बढ़ती लागत के कारण उन्हें घाटा उठाना पड़ता है। कई दुकानदारों ने बताया कि अगर जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें स्थायी रूप से अपना व्यवसाय बंद करना पड़ सकता है।

इस बीच बाजार में यह भी अफवाह फैली कि घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग व्यावसायिक कामों के लिए किया जा रहा है। हालांकि जिला खाद्य नियंत्रक सीएस जादौन ने इस तरह की बातों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई निर्देश या अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में व्यवधान के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे परिवहन में दिक्कत, मांग में अचानक वृद्धि या वितरण प्रणाली में कमी। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करे और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करे।

कुल मिलाकर, भोपाल में एलपीजी संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गैस आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं में थोड़ी सी भी गड़बड़ी बड़े स्तर पर असर डाल सकती है। खासकर छोटे व्यवसायियों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बन जाती है। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मिलकर जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगी, ताकि आम जनता और व्यवसायियों को राहत मिल सके।

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