
डिजिटल भारत की ओर एक और कदम:GEC रायपुर के छात्र का “सह साथी” ऐप बना समाधान-
MSME 5.0 के तहत ₹15 लाख की ग्रांट, जल्द होगा पायलट लॉन्च
रायपुर। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों और कुलियों की वर्षों पुरानी समस्याओं का अब डिजिटल समाधान सामने आया है। GEC रायपुर के छात्र पूर्णेन्द्र धिरही द्वारा विकसित “सह साथी” ऐप एक ऐसा इनोवेटिव प्लेटफॉर्म है, जो तकनीक के माध्यम से दोनों के बीच की दूरी को खत्म करने का प्रयास कर रहा है। इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार की MSME 5.0 योजना के तहत ₹15 लाख की अनुदान राशि प्राप्त हुई है, जो इसकी उपयोगिता और संभावनाओं को दर्शाता है।

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“सह साथी” एक ऑन-डिमांड डिजिटल सहायक बुकिंग प्लेटफॉर्म है, जहां यात्री अपने मोबाइल फोन के जरिए आसानी से कुली (सहायक) बुक कर सकते हैं। ऐप में उपयोगकर्ता अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी जैसे ट्रेन नंबर, पिकअप पॉइंट, गंतव्य और सामान का विवरण दर्ज करता है। इसके बाद नजदीकी उपलब्ध सहायक को रिक्वेस्ट भेजी जाती है, और बुकिंग कन्फर्म होते ही सहायक निर्धारित स्थान पर पहुंचकर सेवा प्रदान करता है।
अक्सर यात्रियों को स्टेशन पर कुली ढूंढने में परेशानी होती है, वहीं कई कुली पूरे दिन काम के इंतजार में रहते हैं। “सह साथी” इस समस्या का सीधा समाधान देता है—यात्रियों को सुविधा और समय की बचत, और कुलियों को नियमित काम और बेहतर आय का अवसर।
पिछले एक वर्ष से इस प्रोजेक्ट पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। GEC रायपुर के छात्र इसे एक स्टार्टअप के रूप में विकसित कर रहे हैं और इसका पायलट लॉन्च जल्द ही रायपुर जंक्शन पर किया जाएगा। भविष्य में इसे देशभर के रेलवे स्टेशनों तक विस्तारित करने की योजना है।
इस सफलता के पीछे प्रोफेसर आर.एस. परिहार का विशेष मार्गदर्शन रहा है, जिन्होंने पूरे एक वर्ष तक लगातार मेंटरिंग और दिशा-निर्देशन प्रदान किया।

“सह साथी” केवल एक ऐप नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए सामाजिक बदलाव की एक पहल है, जो हजारों कुलियों के जीवन में स्थिरता और सम्मान लाने के साथ-साथ यात्रियों के सफर को भी आसान बनाने का वादा करता है।
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