
कोरबा
छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों को पोषण आहार निर्माण और वितरण की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला अब एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तैयार होने वाले ‘टेक-होम राशन’ की व्यवस्था ने न सिर्फ आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया है, बल्कि हजारों महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव भी लाया है।
पहले यह काम बीज विकास निगम के माध्यम से होता था, लेकिन जब इसे स्थानीय महिला समूहों को सौंपा गया, तो यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन गई।
कैसे बदली व्यवस्था
- महिलाओं को उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और पैकेजिंग का प्रशिक्षण
- आधुनिक मशीनों और इकाइयों की स्थापना
- कच्चे माल से लेकर वितरण तक पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के हाथ में
इस प्रक्रिया में महिलाएं सिर्फ श्रमिक नहीं रहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली भूमिका में भी आईं। उत्पादन इकाइयों में काम करते हुए उनके कौशल, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
क्या हुआ फायदा
- नियमित आय से आर्थिक स्थिति मजबूत
- परिवार में निर्णय लेने में बढ़ी भागीदारी
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर
अब ये महिला समूह करीब 72 हजार हितग्राहियों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार पहुंचाने की तैयारी में हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों में समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी और बच्चों व महिलाओं को बेहतर पोषण मिल सकेगा।
कुल मिलाकर, यह पहल केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की एक मजबूत कहानी बनकर सामने आई है।



















