G-7 में भारत की बढ़ती अहमियत, इसलिए पीएम मोदी को मिला फ्रांस का न्योता

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रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक नेतृत्व और समाधान क्षमता पर फ्रांस का भरोसा


नई दिल्ली। फ्रांस में होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष आमंत्रण दिया गया है। हालांकि भारत G-7 का सदस्य नहीं है, फिर भी वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती भूमिका और फ्रांस के साथ मजबूत संबंधों को देखते हुए यह निमंत्रण दिया गया है।

भारत पर फ्रांस को क्यों है भरोसा?

फ्रांसीसी सूत्रों के अनुसार, भारत को आमंत्रित करने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, भारत और फ्रांस के बीच गहरे विश्वास पर आधारित रणनीतिक साझेदारी। दूसरा, वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की वैज्ञानिक और व्यावहारिक सोच, जो दुनिया के लिए उपयोगी साबित होती है।

हर सत्र में शामिल होगा भारत

इस बार भारत को सम्मेलन के सभी प्रमुख सत्रों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही “वैश्विक असंतुलन से निपटना” विषय पर आयोजित विशेष चर्चा में भारत, ब्राजील, दक्षिण कोरिया और केन्या जैसे आमंत्रित देशों के साथ विचार-विमर्श करेगा।

कई वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा

शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन सुरक्षा, दुर्लभ खनिज संसाधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

मोदी-मैक्रों की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी 13 और 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता रक्षा, तकनीक, निवेश और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा कर सकते हैं।

‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में भी होंगे शामिल

फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री मोदी “भारत इनोवेट्स” कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जिसमें 120 से अधिक भारतीय और फ्रांसीसी स्टार्टअप, निवेशक और तकनीकी कंपनियां भाग लेंगी।

स्लोवाकिया दौरे पर भी जाएंगे पीएम

फ्रांस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया के राजकीय दौरे पर भी रहेंगे, जहां द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होगी।

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