
रायपुर गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर उनके व्यक्तित्व और संस्कारों के विकास पर ध्यान देने की पहल सामने आई है। जैन संवेदना ट्रस्ट द्वारा आयोजित शिक्षकों की कार्यशाला में मोटिवेशनल स्पीकर विजय चोपड़ा ने ‘संस्कार आधारित होमवर्क’ का अनोखा विचार साझा किया।
वर्कशॉप का विषय था— “सहेजें अपने विरासत के संस्कारों को”, जिसमें बच्चों के बढ़ते एग्रेशन और डिप्रेशन को कम करने पर भी चर्चा हुई।
क्या होगा इस बार का ‘होमवर्क’
- दादा-दादी, नाना-नानी के साथ समय बिताना
- उनके अनुभवों से सीख लेकर प्रोजेक्ट तैयार करना
- परिवार के साथ धर्मस्थलों की यात्रा और अनुभव साझा करना
- मोहल्ले के वरिष्ठजनों से संवाद बढ़ाना
6 बिंदुओं वाला खास प्रोजेक्ट
विजय चोपड़ा ने शिक्षकों को सुझाव दिया कि 55 दिनों की छुट्टियों में बच्चों को प्रैक्टिकल आधारित प्रोजेक्ट दिया जाए, जिसमें—
- पर्यावरण से जुड़कर जीवन जीने का अनुभव
- दया, करुणा और सहनशीलता जैसे गुणों का अभ्यास
- पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता
- परिवार के साथ समय बिताना और सामूहिक भोजन
- सकारात्मक व्यवहार और संवाद को बढ़ावा
उन्होंने कहा कि संस्कार खरीदे नहीं जा सकते, इन्हें जीवन में अपनाया जाता है, और यही बच्चों के भविष्य की असली नींव होते हैं।
आगे की योजना
जैन संवेदना ट्रस्ट ने बताया कि ऐसी कार्यशालाएं अन्य स्कूलों में भी आयोजित की जाएंगी। छुट्टियों के बाद बच्चों द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट्स में से श्रेष्ठ को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह पहल बच्चों को किताबों से बाहर निकालकर जीवन के वास्तविक अनुभवों से जोड़ने और उन्हें संवेदनशील, संतुलित व जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक अलग और सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।



















