
दुर्ग ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी निजी स्कूलों द्वारा फीस वसूली के खिलाफ अब विरोध तेज हो गया है। ‘नो स्कूल–नो फीस’ लागू करने की मांग को लेकर अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के जरिए राज्य सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अय्यूब खान ने अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।
क्या है मुख्य मुद्दा
- निजी स्कूलों द्वारा फीस में लगातार बढ़ोतरी
- छुट्टियों के दौरान भी ट्यूशन और बस फीस की वसूली
- मध्यम और गरीब वर्ग पर बढ़ता आर्थिक दबाव
ज्ञापन में बताया गया कि कई स्कूल हर साल बिना स्पष्ट कारण फीस में 700 से 1000 रुपये तक बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिससे सालाना खर्च काफी बढ़ जाता है।
अभिभावकों का कहना है कि जब अप्रैल से जून तक स्कूल बंद रहते हैं और बस सेवा भी नहीं चलती, तब इन महीनों की फीस लेना अनुचित है।
मांगें क्या हैं
- ‘नो स्कूल–नो फीस’ नियम लागू किया जाए
- छुट्टियों के दौरान फीस वसूली पर रोक लगे
- निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर नियंत्रण
अय्यूब खान ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने के बजाय इसे सभी वर्गों के लिए सुलभ और किफायती बनाया जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर बढ़ते विरोध के बीच अब नजर सरकार के फैसले पर टिकी है, जो यह तय करेगा कि अभिभावकों को राहत मिलेगी या नहीं।

















