
चित्रकूट। मध्यप्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में बिजली आपूर्ति को लेकर सामने आए एक घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिकारों के उपयोग पर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि न्यायिक अधिकारी के सरकारी आवास में बिजली बाधित होने के बाद पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति रोक दी गई, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में पहले से ही आंधी और तेज तूफान के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित थी। विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 33 केवी फीडरों में तकनीकी खराबी आने से कई इलाकों में आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसे चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा रहा था। हालांकि कुछ व्यक्तिगत कनेक्शनों में तकनीकी समस्या बनी हुई थी, जिनमें न्यायिक अधिकारी का सरकारी आवास भी शामिल बताया गया।
स्थानीय सूत्रों और बिजली विभाग के कर्मचारियों के अनुसार, शुक्रवार शाम न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ रजौला विद्युत उपकेंद्र पहुंचे। आरोप है कि आवास की बिजली बहाल न होने पर नाराजगी व्यक्त की गई और इसके बाद पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। बताया जा रहा है कि रजौला तथा प्रमोद वन उपकेंद्रों से संचालित सप्लाई कुछ समय के लिए बंद कर दी गई, जिससे लगभग पांच हजार से अधिक उपभोक्ता अंधेरे में रहे।
अचानक बिजली गुल होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। बड़ी संख्या में नागरिक उपकेंद्र पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। लोगों का कहना था कि यदि किसी एक घर या परिसर में तकनीकी समस्या है तो उसका समाधान अलग से किया जाना चाहिए, न कि पूरे कस्बे को बिजली कटौती का सामना करना पड़े।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद बिजली आपूर्ति पुनः बहाल की गई और हालात सामान्य हुए।
घटना के बाद पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। प्रशासनिक अधिकारों के कथित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं, वहीं स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
हिंदी पत्रकारिता दिवस: जानिए 30 मई का इतिहास, महत्व और पत्रकारों की प्रेरक कहानियाँ
साजिश का जाल, समय रहते वार: दिल्ली पुलिस ने 9 संदिग्धों को दबोचकर टाला बड़ा खतरा



















