राज्य कोटे पर डाका! फर्जी निवास प्रमाणपत्र से अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती का खेल बेनकाब

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राज्य कोटे पर डाका! फर्जी निवास प्रमाणपत्र से अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती का खेल बेनकाब

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी दस्तावेजों के सहारे स्थानीय निवास प्रमाणपत्र बनवाकर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती दिलाने वाले एक संगठित रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। बलरामपुर पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों और डिजिटल हेरफेर के जरिए 20 से अधिक स्थानीय निवास प्रमाणपत्र तैयार कराए, जिनका इस्तेमाल सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ जैसी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की भर्तियों में किया गया।

मामले की शुरुआत 28 अप्रैल 2026 को हुई, जब बलरामपुर तहसीलदार ने थाना बलरामपुर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 204 कोबरा बटालियन में पदस्थ कांस्टेबल सुमित सिंह ने दूसरे व्यक्ति के शैक्षणिक दस्तावेजों में फेरबदल कर अपने नाम से स्थानीय निवास प्रमाणपत्र बनवाया। जांच में खुलासा हुआ कि सुमित मूल रूप से राजस्थान का निवासी है, लेकिन उसने स्वयं को छत्तीसगढ़ का निवासी दर्शाकर राज्य कोटे का लाभ लिया और वर्ष 2023 में सीआरपीएफ में भर्ती हासिल कर ली। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।

मध्यप्रदेश से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क

जांच आगे बढ़ी तो इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे मध्यप्रदेश के मुरैना निवासी विवेक सिंह तोमर का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार विवेक और उसका सहयोगी आकाश शर्मा फर्जी दस्तावेज तैयार कर ऑनलाइन माध्यम से स्थानीय निवास प्रमाणपत्र बनवाने का काम करते थे। दोनों ने स्वयं भी कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए छत्तीसगढ़ के निवासी प्रमाणपत्र हासिल किए थे।

ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल का दुरुपयोग

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर फर्जी नागरिक पहचान तैयार करते थे। आरोपियों द्वारा नाम, पता और अन्य जानकारियों में बदलाव कर नकली दस्तावेज अपलोड किए जाते थे, जिसके आधार पर स्थानीय निवास प्रमाणपत्र जारी हो जाते थे।

इस पूरे नेटवर्क में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि एक प्रमाणपत्र तैयार कराने के बदले 3 से 4 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।

20 से ज्यादा भर्तियां संदेह के घेरे में

जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक 20 से अधिक फर्जी निवास प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की भर्ती में किया जा चुका है। पुलिस ने संबंधित सुरक्षा बलों को पत्र लिखकर ऐसे अभ्यर्थियों की जानकारी मांगी है, जिन्होंने इन दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की हो।

और बड़े खुलासों की संभावना

पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल कुछ फर्जी प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी तथा कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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