हरी खाद और वर्मी कम्पोस्ट से सुधरेगी मिट्टी की सेहत, किसानों को कृषि विभाग की सलाह

0
12

जशपुर में मृदा स्वास्थ्य सुधार अभियान तेज


जशपुरनगर। जशपुर जिले में कृषि विभाग मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए किसानों को हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक खादों के उपयोग के लिए लगातार जागरूक कर रहा है। विभाग का लक्ष्य मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाकर उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखना है।

हरी खाद से बढ़ेगी भूमि की उर्वराशक्ति

कृषि विभाग किसानों को ढैंचा, सनई जैसी हरी खाद वाली फसलें अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इन फसलों के उपयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थ और कार्बन की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि की संरचना मजबूत होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। राज्य सरकार की हरी खाद योजना के तहत भी किसानों को इसका लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट पर विशेष जोर

विभाग ने किसानों से गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक खादों का अधिक उपयोग करने की अपील की है। साथ ही फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेतों में मिलाने की सलाह दी जा रही है, ताकि मिट्टी की उर्वराशक्ति और जैविक तत्वों की मात्रा बनी रहे। इसके लिए समय-समय पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से मिलेगा सही मार्गदर्शन

किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें खेत की मिट्टी के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों और उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी जाती है। इससे किसान जरूरत के मुताबिक उर्वरक इस्तेमाल कर अनावश्यक खर्च और असंतुलित उपयोग से बच सकते हैं।

संतुलित खेती अपनाने की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करें। विभाग का कहना है कि जैविक खाद और संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग न केवल बेहतर उत्पादन देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खेती की जमीन को उपजाऊ बनाए रखने में मदद करेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here