
नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने स्वच्छ ईंधन वाले कमर्शियल वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय परमिट के तहत उनकी निर्धारित आयु सीमा 5 साल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इसमें इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और CNG वाहनों को शामिल किया गया है।
12 और 15 साल की सीमा बढ़कर हो सकती है 17 और 20 साल
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इस पर आम लोगों, वाहन उद्योग और अन्य हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर नियम 88 के दायरे में आने वाले संबंधित वाहनों की मौजूदा 12 और 15 वर्ष की आयु सीमा बढ़कर क्रमशः 17 और 20 वर्ष हो सकती है। यह छूट सभी कमर्शियल वाहनों के लिए नहीं होगी।
राष्ट्रीय परमिट की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
सरकार ने राष्ट्रीय परमिट व्यवस्था को अधिक आसान और डिजिटल बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। आवेदक एक बार में अधिकतम 5 वर्ष का राष्ट्रीय परमिट ले सकेंगे। इसके लिए ₹16,500 प्रति वर्ष शुल्क प्रस्तावित है।
फॉर्म-46 के जरिए आवेदन और फॉर्म-47 के तहत परमिट जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का प्रस्ताव है। इससे कागजी कार्यवाही कम होने और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
अस्थायी पंजीकरण के नियमों में बदलाव
मसौदे में चेसिस वाले वाहनों के अस्थायी पंजीकरण की अवधि में भी बदलाव प्रस्तावित है। बिना बॉडी वाले वाहन का अस्थायी पंजीकरण 6 महीने तक वैध रखने का प्रस्ताव है। विशेष परिस्थितियों में इसे हर बार 30 दिन के लिए बढ़ाया जा सकेगा।
दूसरे राज्य में पंजीकरण के लिए ले जाए जा रहे पूर्ण निर्मित वाहनों के लिए अस्थायी पंजीकरण की अवधि 45 दिन प्रस्तावित की गई है।
ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को भी ट्रेड सर्टिफिकेट
सरकार ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में रिसर्च एवं डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए पात्र ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को ट्रेड सर्टिफिकेट से जुड़े प्रावधानों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। DSIR से मान्यता प्राप्त और नए ऑटोमोबाइल उत्पादों पर R&D करने वाले निर्माता इसके दायरे में आ सकते हैं।
वाहन दस्तावेजों को और डिजिटल बनाने की तैयारी
मसौदे में वाहन संबंधी दस्तावेजों को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया गया है। डीलर अथॉरिटी सर्टिफिकेट या वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करने पर वाहन पोर्टल से जरूरी जानकारी स्वतः प्राप्त होने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा डीलरों से GST नंबर, PAN, उद्यम आधार और CIN जैसी जानकारियां लेने तथा वाहन मालिकों के लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का उल्लेख करने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
फिलहाल ये सभी बदलाव प्रस्तावित हैं। हितधारकों से प्राप्त सुझावों पर विचार के बाद ही सरकार अंतिम नियम अधिसूचित करेगी।


















