
नई दिल्ली । रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत के स्वदेशी ‘आकाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है। उन्होंने कहा कि आकाश भारत के रक्षा क्षेत्र की प्रमुख सफलता की कहानियों में से एक है और यह देश की मिसाइल डिजाइन एवं उत्पादन क्षमता के विकसित होने को दर्शाता है।
रक्षा सचिव ने कहा कि आर्मेनिया आकाश का पहला विदेशी ग्राहक था, जिसने कई बैटरियां खरीदीं। इसके बाद ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी इसका निर्यात किया गया। उन्होंने बताया कि आकाश का उत्पादन अब स्थिर स्तर पर पहुंच चुका है और भारतीय सशस्त्र बलों के लिए भी इसकी खरीद जारी है।
स्वदेशी मिसाइल डिजाइन और उत्पादन की क्षमता
राजेश कुमार सिंह ने आकाश को भारत की रक्षा निर्माण क्षमता का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह तेज गति से उड़ने वाले हवाई लक्ष्यों से निपटने में सक्षम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से इस प्रणाली के लिए और ऑर्डर मिल सकते हैं।
DRDO के अनुसार, आकाश एक कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जो एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। यह प्रणाली भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना में शामिल है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी रहा चर्चा में
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम चर्चा में रहा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत के बहुस्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क में आकाश समेत कई स्वदेशी प्रणालियों को तैनात किया गया था। सरकार ने हवाई खतरों से निपटने में इन प्रणालियों की भूमिका पर जोर दिया था।
आकाश प्राइम की बढ़ी क्षमताएं
आकाश के उन्नत संस्करण ‘आकाश प्राइम’ ने भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। जुलाई 2025 में लद्दाख में किए गए परीक्षणों के दौरान आकाश प्राइम ने 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर तेज गति से उड़ने वाले दो मानवरहित हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया था।
आकाश सिस्टम का घरेलू उत्पादन, भारतीय सशस्त्र बलों में इसकी तैनाती और विदेशी देशों को इसका निर्यात भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता के विस्तार को दर्शाता है।

















