हाइड्रोजन ट्रेन को 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की तैयारी

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रेलवे बोर्ड ने दी जानकारी, 120 किमी प्रति घंटे की गति का परीक्षण पूरा; दूसरे रेल खंडों पर संचालन की संभावनाएं भी तलाशी जा रहीं


इंदौररेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ सतीश कुमार ने कहा है कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से संचालित करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि ट्रेन का 120 किमी प्रति घंटे की गति के लिए परीक्षण पूरा हो चुका है, जबकि फिलहाल इसकी परिचालन गति अधिकतम 75 किमी प्रति घंटा रखी गई है।

सतीश कुमार ने इंदौर में रेल परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान बताया कि हरियाणा के जींद-सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर पहली हाइड्रोजन ट्रेन संचालित की जा रही है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। रेलवे अब अन्य रेल खंडों पर भी इस ट्रेन के संचालन की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन को किन रेल मार्गों पर चलाया जा सकता है, इस संबंध में सभी हितधारकों से चर्चा और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। साथ ही हाइड्रोजन ईंधन की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था का भी आकलन किया जा रहा है।

इस साल 11 और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मिलने की उम्मीद

रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस हावड़ा और कामाख्या के बीच संचालित हो रही है। चार और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें तैयार हो चुकी हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया जाएगा। रेलवे को इस साल 11 और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि 200 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें PPP मॉडल पर तैयार की जा रही हैं, जिन्हें पूरा होने में करीब एक से डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है। वहीं उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले को देखते हुए रेलवे 100 से 125 विशेष ट्रेनें चलाने की योजना पर काम कर रहा है और आयोजन के लिए रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

AI से रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों की सुरक्षा होगी मजबूत

सतीश कुमार ने कहा कि ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए CCTV कैमरों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को जोड़ा जा रहा है। ट्रेनों में चूहों की समस्या के समाधान के लिए भी प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 18,500 करोड़ रुपये की इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार इस महत्वाकांक्षी रेल लाइन का निर्माण चार से पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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