झीरम घाटी कांड में 10 नक्सली दोषी करार, 13 साल बाद आया फैसला

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जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने सुनाया फैसला; 25 मई 2013 के हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की हुई थी मौत


रायपुर छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में 13 साल बाद अदालत का फैसला आया है। जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई के बाद 10 नक्सलियों को दोषी करार दिया है। मामले की अंतिम दलीलें 12 अगस्त को पूरी हुई थीं, जिसके बाद अदालत को 31 अगस्त को फैसला सुनाना था, लेकिन निर्णय टल गया था।

यह मामला 25 मई 2013 को सुकमा में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के बाद लौट रहे काफिले पर हुए माओवादी हमले से जुड़ा है। झीरम घाटी के घने जंगलों में हथियारबंद माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी।

हमले में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा तथा पूर्व विधायक उदय मुदलियार की भी जान गई थी। कई सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता भी हमले में मारे गए थे। गंभीर रूप से घायल विद्याचरण शुक्ल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

NIA ने 2014 में दाखिल की थी पहली चार्जशीट

झीरम घाटी मामले में NIA ने 25 सितंबर 2014 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें गिरफ्तार नौ आरोपियों के नाम शामिल थे। इसके बाद दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई और जांच एजेंसी ने 28 सितंबर 2015 को 35 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।

मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। वहीं, 33 नामजद आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं। अंतिम दलीलों से पहले अदालत ने मामले में कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए।

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