वीतरागता और आत्म-विश्वास ही वास्तविक धर्म: मुनि आगम सागर

0
120

बाहरी सुख-सुविधाओं और ख्याति की लालसा छोड़ आत्म-चिंतन की ओर बढ़ने का संदेश, बड़ा मंदिर में धार्मिक आयोजन


रायपुर मालवीय रोड स्थित दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में समयोपदेश वर्षायोग 2026 के तहत धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन जारी हैं। मुनि आगम सागर, मुनि पुनीत सागर, एलक धैर्य सागर और एलक स्वागत सागर के ससंघ सानिध्य में श्रद्धालुओं ने जिन-अभिषेक, शांतिधारा और आहारदान में भाग लिया।

प्रातःकालीन धार्मिक कक्षा में मुनि आगम सागर ने तत्त्वार्थ सूत्र और छह ढाला जैसे जैन दर्शन के महत्वपूर्ण ग्रंथों का स्वाध्याय कराया। मंगल देशना में उन्होंने सम्यक् चारित्र, आत्म-कल्याण और कर्म सिद्धांत की चर्चा करते हुए कहा कि बाहरी सांसारिक पदार्थों से ध्यान हटाकर आत्मा में स्थित होना ही वास्तविक निश्चय चारित्र की दिशा है। आत्म-तत्त्व में विश्वास ही व्यक्ति को आत्मकल्याण के लिए पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देता है।

मुनिश्री ने कहा कि ख्याति, लाभ, पूजा, धन-संपदा और भौतिक सुविधाओं की लालसा से ऊपर उठना जरूरी है। उन्होंने समझाया कि ख्याति, पूजा और लाभ केवल इच्छा से प्राप्त नहीं होते, बल्कि पूर्वकृत पुण्य कर्मों के उदय से मिलते हैं। इसके विपरीत ईर्ष्या, द्वेष और क्लेश जैसे भाव कर्मों को मलिन करने का कारण बनते हैं।

वस्तु के वास्तविक स्वरूप को स्वीकार करना जरूरी

मुनि आगम सागर ने तत्त्व-श्रद्धान पर जोर देते हुए कहा कि जीव को जीव और अजीव को अजीव के रूप में स्वीकार करना चाहिए। वस्तु के वास्तविक स्वरूप को उसी रूप में स्वीकार करने से गलत मान्यताओं से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सही श्रद्धा और आत्मचिंतन मोक्ष मार्ग की दिशा में आगे बढ़ने में सहायक हैं।

उन्होंने कहा कि ख्याति, पूजा और लाभ की इच्छा आत्मा की व्याधि के समान है। इसलिए मनुष्य को बाहरी उपलब्धियों के बजाय आत्म-चिंतन और वीतरागता को जीवन में स्थान देना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने श्रद्धालुओं को जिनेन्द्र भगवान के दरबार में पहुंचकर धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

विश्व शांति के लिए शांतिधारा, मुनिराजों को कराया आहारदान

धार्मिक कार्यक्रम में मूलनायक भगवान का भव्य जिन-अभिषेक और विश्व शांति के लिए वृहद शांतिधारा संपन्न हुई। त्रिकाल चौबीसी में भगवान विराजमान करने वाले सरिता जैन, श्रेयश जैन, रुचि जैन, वंशिका जैन और निर्वि जैन परिवार को मूलनायक भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य मिला। अभिषेक जैन, शालिनी जैन और सर्वम जैन परिवार ने भी शांतिधारा की।

इसके बाद नवधा भक्ति पूर्वक मुनिराजों और एलकश्री की आहारचर्या संपन्न हुई। मुनि आगम सागर और मुनि पुनीत सागर को शकुंतला देवी-राजकुमार जी तथा कविता मोदी और नवीन मोदी ने आहारदान दिया। एलक धैर्य सागर को रीता-निर्मल जैन, आशु जैन और नीरज जैन ने आहारदान कराया, जबकि एलक स्वागत सागर का व्रत का नियम रहा। वर्षायोग समिति और सकल दिगम्बर जैन समाज ने श्रद्धालुओं से जिन-अभिषेक, शांतिधारा, नवधा भक्ति और जिनवाणी श्रवण में शामिल होने का आह्वान किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here