जैव विविधता बचाने का मॉडल बनी मनोहर गौशाला, बदल रही गांव की तस्वीर

0
16

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विशेष


रायपुर खैरागढ़ की मनोहर गौशाला आज जैव विविधता संरक्षण का एक सफल मॉडल बनकर सामने आई है। यहां पिछले 12 वर्षों से तालाब निर्माण, हरित क्षेत्र विकास और प्राकृतिक खेती के जरिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसका सकारात्मक असर अब आसपास के गांवों में भी दिखाई देने लगा है।

गौशाला में तैयार किए जा रहे जैविक उत्पाद खेती को रसायनमुक्त बनाने में मदद कर रहे हैं। संस्था का मानना है कि जैव विविधता संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति निरंतर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।

तालाब और हरित क्षेत्र से बदला माहौल

मनोहर गौशाला ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बना लिया है। यहां एक दशक से अधिक समय में कई तालाब बनाए गए हैं और बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित किया गया है। इससे पेड़-पौधों, पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए बेहतर प्राकृतिक वातावरण तैयार हुआ है।

प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

गौशाला द्वारा तैयार किए जा रहे “फसल अमृत” और “मनोहर ऑर्गेनिक गोल्ड” जैसे जैविक उत्पाद किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित कर रहे हैं। इससे:

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है
  • रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो रही है
  • खेती की लागत घट रही है
  • उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो रही है

गौशाला किसानों को प्राकृतिक खेती और जैव विविधता संरक्षण से जुड़ा प्रशिक्षण भी दे रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ रही है।

जल स्तर और खेती पर सकारात्मक असर

विशेषज्ञों के अनुसार जैव विविधता केवल पेड़-पौधों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें मिट्टी, पानी और जीव-जंतु भी शामिल हैं।

मनोहर गौशाला के मॉडल का असर आसपास के क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। यहां जल स्तर में सुधार हुआ है और खेती की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here