ऐतिहासिक तथ्यों में गड़बड़ी पर सरकार सख्त, गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

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रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े तथ्यों में कथित गड़बड़ी का मामला जोरदार ढंग से उठा। बिलासपुर जिले के प्राचीन स्थल मल्हार से मिले राजा बालार्जुन के ताम्रपत्रों की भाषा और लिपि को लेकर संस्कृति विभाग की ओर से सदन में दी गई जानकारी पर सवाल खड़े होने के बाद सरकार ने जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

विधायक ने उठाए गलत जानकारी देने के आरोप

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ और आकाशवाणी के आधिकारिक दस्तावेजों में इन ताम्रपत्रों की भाषा पाली और लिपि ब्राह्मी बताई थी। जबकि संस्कृति विभाग ने विधानसभा में दिए अपने लिखित जवाब में इनकी भाषा संस्कृत और लिपि ब्राह्मी दर्ज की।

इतिहास से जुड़े तथ्यों पर उठे सवाल

विधायक ने सवाल किया कि जब इस विषय पर पहले से आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है, तो विभाग ने सदन में अलग तथ्य किस आधार पर प्रस्तुत किए। उन्होंने इसे राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

निजी संरक्षण में हैं ताम्रपत्र

चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 1987 में मिले ये ऐतिहासिक ताम्रपत्र फिलहाल किसी संग्रहालय में नहीं, बल्कि संजीव पांडेय नामक स्थानीय नागरिक के निजी संरक्षण में सुरक्षित रखे गए हैं।

विपक्ष ने की सख्त कार्रवाई की मांग

मामले पर पक्ष और विपक्ष दोनों ने चिंता जताई। वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने इसे गंभीर लापरवाही बताया, जबकि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन को गलत जानकारी देने वाले अधिकारी को तत्काल निलंबित करने की मांग की।

मंत्री ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज होने के कारणों की पड़ताल की जाएगी और यदि कोई अधिकारी भ्रामक जानकारी देने का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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