चिरमिरी में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता रैली, लोगों से समय पर उपचार लेने की अपील

0
6


मानसिक स्वास्थ्य पर झिझक छोड़कर खुलकर बात करने का संदेश, टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 से मिलेगी निःशुल्क सहायता

एमसीबी। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। मानसिक तनाव, अवसाद और घबराहट जैसी समस्याओं को छिपाने के बजाय समय पर सहायता लेना बेहतर जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला चिकित्सालय चिरमिरी में जागरूकता रैली और गोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस वर्ष की वैश्विक थीम “Lived Experiences Heard: Real Voices, Real Change” यानी अनुभवों को सुनें, वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव रखी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सामाजिक भ्रांतियों और अंधविश्वास को दूर करना तथा जरूरतमंदों को समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए प्रेरित करना था।

मानसिक स्वास्थ्य पर झिझक छोड़ें, समय पर लें चिकित्सकीय सहायता

कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन, सिविल सर्जन डॉ. अभय सिंह तोमर के नेतृत्व और जिला नोडल अधिकारी राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) डॉ. नम्रता चक्रवर्ती के समन्वय में किया गया। जिला कार्यक्रम प्रबंधक शिशिर जायसवाल और प्रभारी हॉस्पिटल मैनेजर वीरेन्द्र साव का भी सहयोग रहा।

रैली में के.बी. पटेल नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं, जिला चिकित्सालय के नर्सिंग स्टाफ और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने नारों और जागरूकता संदेशों वाली तख्तियों के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण है, लेकिन सामाजिक झिझक और भेदभाव के कारण कई लोग अपनी समस्याएं खुलकर साझा नहीं कर पाते। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जिले के अंतिम छोर तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें और जरूरतमंद बिना किसी डर या संकोच के सहायता ले सकें।

उन्होंने कहा कि लगातार उदासी, घबराहट या अन्य मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अनुभवों को सुनना भी जरूरी

जिला नोडल अधिकारी डॉ. नम्रता चक्रवर्ती ने कहा कि इस वर्ष की थीम मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर चुके लोगों के अनुभवों को सुनने, समझने और सम्मान देने पर केंद्रित है। मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति भेदभाव और उपेक्षा समाप्त करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि समाज में संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करके वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर विशेषज्ञ की सलाह व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकती है।

नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद पर जोर

गोष्ठी में मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, योग, व्यायाम और सुबह की सैर जैसी स्वस्थ आदतें अपनाने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि परिवार और मित्रों के साथ बातचीत करना तथा अपनी परेशानियां साझा करना तनाव कम करने में मददगार हो सकता है।

लंबे समय तक उदासी, अत्यधिक चिंता, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन या दैनिक गतिविधियों में रुचि कम होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कमजोरी समझने के बजाय उन्हें पहचानना और उचित सहायता लेना जागरूकता का परिचायक है।

टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 से लें निःशुल्क परामर्श

कार्यक्रम के दौरान जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने मानसिक तनाव, अवसाद, परीक्षा और नौकरी से जुड़ी चिंता जैसी समस्याओं के लिए उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी।

लोगों को राष्ट्रीय टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 के बारे में बताया गया, जिसके माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता और परामर्श प्राप्त किया जा सकता है। जरूरतमंदों को उपलब्ध डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सहायता लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here