महादेव बेटिंग ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी तेज

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रायपुर महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, रॉयल ओमान पुलिस ने इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर उसे हिरासत में लिया है। अब भारत सरकार उसके प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में जुट गई है।

फर्जी पासपोर्ट से ओमान पहुंचने का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में अवैध रूप से प्रवेश करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उसे मस्कट के हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। बताया जा रहा है कि उसने अपनी पैरवी के लिए स्थानीय वकीलों की टीम भी नियुक्त की है। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध है, जिसमें तीन से पांच वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

रेड नोटिस हटाने की याचिका पहले ही हो चुकी है खारिज

हाल ही में इंटरपोल की कमिशन फॉर द कंट्रोल ऑफ इंटरपोल्स फाइल्स (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। उसने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं, लेकिन CCF ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और रेड नोटिस बरकरार रखा।

2019 से भारत से बाहर था आरोपी

जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर 2019 से भारत से बाहर रह रहा था। वह लंबे समय तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहा, जहां 2024 में इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया था। हालांकि उस समय प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और बाद में वह रिहा हो गया। इसके बाद वह कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए ओमान पहुंच गया।

हजारों करोड़ के सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI कर रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है।

ईडी अब तक इस मामले में 175 से अधिक स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है। एजेंसी ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार, 74 लोगों को आरोपी बनाया है और रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पांच अभियोजन शिकायतें दाखिल की हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में अब तक करीब 4,336 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं।

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