
दुष्कर्म और POCSO मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए 3,788 करोड़ रुपये मंजूर, मौजूदा 779 अदालतों का होगा विस्तार
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को पांच साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देशभर में अदालतों की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। इसके लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
योजना का उद्देश्य दुष्कर्म और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी योजना को जारी रखने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न्याय मिलने में होने वाली देरी कम करने में मदद मिलेगी।
योजना पर खर्च होंगे 3,788 करोड़ रुपये
योजना के लिए स्वीकृत कुल 3,788.04 करोड़ रुपये में से केंद्र सरकार 2,353.15 करोड़ रुपये देगी, जबकि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 1,434.89 करोड़ रुपये का योगदान करेंगे। केंद्र सरकार की हिस्सेदारी निर्भया फंड से उपलब्ध कराई जाएगी।
जिलों में लंबित मामलों के आधार पर बढ़ेंगी अदालतें
सरकार मौजूदा 779 सक्रिय फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 करेगी। अतिरिक्त अदालतों की स्थापना उन जिलों में लंबित दुष्कर्म और POCSO मामलों की संख्या के आधार पर की जाएगी, जहां इनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
हर अदालत में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। इससे इन संवेदनशील मामलों की सुनवाई पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा और न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलेगी।
पीड़ितों और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल
फास्ट ट्रैक अदालतों को संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्र

















