दाऊ रामचंद्र देशमुख के नाम पर राज्य अलंकरण देने की मांग गूंजी

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राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, रायपुर में आयोजित प्रांतीय सम्मेलन की राज्य स्तरीय बैठक में चंदैनी-गोंदा के संस्थापक और लोक कला के पुरोधा दाऊ रामचंद्र देशमुख के नाम पर राज्य अलंकरण देने की मांग जोरदार तरीके से उठी। यह प्रस्ताव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के जिलाध्यक्ष आत्माराम ‘कोशा’ अमात्य द्वारा रखा गया, जिसे पूरे प्रदेश के जिला समन्वयकों और साहित्यकारों ने एकमत समर्थन दिया। इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षरित ज्ञापन आयोग की सचिव अभिलाषा बेहार को सौंपा गया।

श्रीमती बेहार ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह ज्ञापन आगे संस्कृति मंत्री, संस्कृति सचिव और संस्कृति संचालक को भेजा जाएगा ताकि शासन स्तर पर इस पर गंभीरता से विचार हो सके।

लोक रंगकर्म में योगदान के लिए अलंकरण की मांग

बैठक में छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति के जिलाध्यक्ष अखिलेश प्रसाद मिश्रा और सचिव मानसिंह मौलिक ने कहा कि दाऊ रामचंद्र देशमुख ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को नई पहचान दी। उन्होंने “चंदैनी-गोंदा” जैसी संस्था के माध्यम से राज्य में सांस्कृतिक चेतना जगाई और लक्ष्मण मस्तुरिहा व खुमान लाल साव जैसे दिग्गज कलाकारों को मंच दिया, जिनके नाम पर आज राज्य अलंकरण दिए जाते हैं। समिति का कहना है कि अब समय आ गया है कि लोककला और रंगकर्म के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों को “दाऊ रामचंद्र देशमुख राज्य अलंकरण” से सम्मानित किया जाए।

राजभाषा दिवस 28 नवंबर को

बैठक में यह भी तय किया गया कि छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस 28 नवंबर को रायपुर के सर्किट हाउस में मनाया जाएगा। इससे पहले महंत राजा धासीदास संग्रहालय के राजा दिग्विजय दास ऑडिटोरियम में राजभाषा आयोग के प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन होगा।

बैठक में राज्यभर से कई प्रमुख कवि, साहित्यकार और कलाकार शामिल हुए, जिनमें काशीपुरी कुंदन (राजिम), रामानंद त्रिपाठी (बेमेतरा), विवेक तिवारी (बिलासपुर), किशोर तिवारी (भिलाई-दुर्ग), चमेली बाई (जगदलपुर), शकुंतला (दंतेवाड़ा), शरद तिवारी (बैकुंठपुर), चंद्रशेखर शर्मा (धमतरी), डॉ. मोहन साहू (सूरजपुर), रामेश्वर शर्मा (रायपुर) और प्रदीप मिश्रा (कांकेर) सहित अनेक वरिष्ठ रचनाकार मौजूद रहे।

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