
रायपुर भगवान महावीर के कैवल्य कल्याणक दिवस के अवसर पर विश्वभर में जैन समाज ने एक साथ नवकार महामंत्र का जाप कर शांति और अहिंसा का संदेश दिया। जैन संवेदना ट्रस्ट के आह्वान पर गोदोहासन मुद्रा में किए गए इस विशेष जाप में देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु जुड़े।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि युद्ध और हिंसा से मुक्त समाज की स्थापना के लिए सामूहिक प्रार्थना करना रहा। जैन समाज ने भाईचारे, शांति और समृद्धि की कामना के साथ सवा 5 लाख से अधिक नवकार जाप किए।
कैसे हुआ आयोजन
- 25 हजार से अधिक परिवारों ने घर-घर में किया जाप
- मंदिरों और वृक्षों के नीचे दीप प्रज्वलित कर साधना
- बच्चों ने भी उत्साह के साथ भाग लेकर परंपरा को समझा
- देश के कई राज्यों और विदेशों से जुड़ी सहभागिता
जैन धर्म में गोदोहासन मुद्रा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भगवान महावीर ने इसी मुद्रा में ध्यान करते हुए केवल ज्ञान की प्राप्ति की थी। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से जाप किया।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रार्थना के जरिए विश्व के नेताओं को सद्बुद्धि मिले और वे अहिंसा, दया और करुणा के मार्ग पर चलकर शांति स्थापित करें—यही संदेश इस आयोजन का केंद्र रहा।
कुल मिलाकर, यह आयोजन आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ वैश्विक शांति का एक सशक्त संदेश बनकर उभरा।


















