एकलव्य छात्रावास में 12वीं के छात्र ने लगाई फांसी, हॉस्टल प्रबंधन पर उठे सवाल

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परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग


धमतरी । धमतरी जिले से एक दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। केरेगांव थाना क्षेत्र के पत्थरीडीह स्थित एकलव्य आवासीय छात्रावास में 12वीं कक्षा के छात्र हिमांशु नेताम (17 वर्ष) ने कथित रूप से कमरे के अंदर सीलिंग फैन से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से छात्रावास परिसर में अफरा-तफरी मच गई है और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
हॉस्टल में मचा हड़कंप
मंगलवार देर रात यह घटना सामने आई जब छात्रावास के अन्य छात्रों ने हिमांशु को पंखे से लटकते देखा। उन्होंने तुरंत वार्डन और हॉस्टल प्रबंधन को सूचना दी। इसके बाद केरेगांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
छात्रों ने बताया कि हिमांशु कुछ समय से चुप-चुप रहता था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
परिजनों ने उठाए सवाल — “हंसमुख बच्चा आत्महत्या कैसे कर सकता है?”
मृतक छात्र के पिता ने कहा कि हिमांशु हमेशा पढ़ाई में अच्छा था और जीवन को लेकर सकारात्मक सोच रखता था। उन्होंने कहा कि हमें विश्वास नहीं होता कि वह खुद ऐसा कदम उठा सकता है। अगर यह आत्महत्या है तो वजह क्या थी? हमें पूरी सच्चाई जाननी है। अगर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। परिजनों ने जिला प्रशासन और पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस ने हर एंगल से जांच शुरू की
केरेगांव थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन मौत के कारणों को लेकर सभी पहलुओं से जांच जारी है।
पुलिस ने कमरे से छात्र का मोबाइल फोन, नोट्स और अन्य निजी सामान जब्त किया है। इन वस्तुओं को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी ने उसे उकसाया या धमकाया तो नहीं।
हॉस्टल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद एकलव्य छात्रावास की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि हॉस्टल में सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहायता की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि “वार्डन उस वक्त कहां था जब यह घटना हुई?
जिला प्रशासन ने भी मामले में गंभीरता दिखाते हुए कहा है कि यदि प्रबंधन की लापरवाही साबित होती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक जांच के आदेश
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी और आदिवासी विकास विभाग ने छात्रावास के पूरे प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग की भी सिफारिश की गई है।
एक और सवाल: क्यों बढ़ रहे हैं हॉस्टल आत्महत्याओं के मामले?
राज्य के कई जिलों में बीते कुछ महीनों में छात्रावासों में आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक पढ़ाई का दबाव, घर से दूरी और मानसिक सहारा न मिलना ऐसी घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं। समाजशास्त्रियों ने सरकार से मांग की है कि सभी छात्रावासों में नियमित मनोवैज्ञानिक परामर्श व्यवस्था लागू की जाए।
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