ऑपरेशन साइबर शील्ड : फर्जी सिम बेचने वाला आरोपी मध्यप्रदेश से गिरफ्तार

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रायपुर । साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। फर्जी सिम कार्ड बेचकर देशभर में साइबर ठगी को बढ़ावा देने वाले एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी द्वारा बेचे गए सिम कार्ड का इस्तेमाल म्यूल बैंक खाते, टेलीग्राम रिव्यू टास्क, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, पहचान की चोरी, फर्जी शेयर ट्रेडिंग और सस्ते सामान बेचने के नाम पर की जा रही साइबर ठगी में किया गया।

पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में साइबर अपराधियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में थाना सिविल लाइन रायपुर में अपराध क्रमांक 290/25 धारा 317(2), 317(4), 317(5), 3(5) बीएनएस एवं 42(3) टेलीग्राफ एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के पीड़ितों से 18.52 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज है, जिसमें 41 मोबाइल सिम कार्ड की संलिप्तता सामने आई है। मामले की विवेचना रेंज साइबर थाना रायपुर द्वारा की जा रही है।

जांच के दौरान संबंधित सिम सेवा प्रदाता कंपनियों से तकनीकी जानकारी प्राप्त की गई। तकनीकी विश्लेषण, पीड़ितों और साक्षियों से पूछताछ के आधार पर फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले आरोपी रामकृष्ण कुशवाहा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

आरोपी “शिवम मोबाइल” और “रामकृष्ण मोबाइल” के नाम से प्वाइंट ऑफ सेल खोलकर VI, जियो और एयरटेल के सिम कार्ड बेचने का काम करता था। आरोपी के पास से प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है।

अपराध का तरीका

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह नए सिम लेने या सिम पोर्ट कराने आए ग्राहकों की ई-केवाईसी के दौरान डबल थंब स्कैन या आई ब्लिंक का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट करता था। वहीं जिन ग्राहकों के पास आधार कार्ड की फिजिकल कॉपी होती थी, उनके विवरण का स्वयं सत्यापन कर डी-केवाईसी के जरिए अतिरिक्त सिम चालू कर देता था। इन फर्जी सिम कार्ड को वह ऊंचे दामों पर अन्य साइबर अपराधियों को बेचता था।

गिरफ्तार आरोपी :

रामकृष्ण कुशवाहा पिता छोटेलाल कुशवाहा उम्र 32 वर्ष, पता ग्राम बंशीपुर मंगरौरा मईहर मध्यप्रदेश।

वर्तमान पता : प्राइम रोज, शालिगांव, संगोल्दा गोवा।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों का दुरुपयोग न होने दें और किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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