
नई दिल्ली भारत का स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बन सकता है। CEEW और NRDC इंडिया की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्यों से 44 लाख से अधिक रोजगार सृजित हो सकते हैं। रिपोर्ट में रूफटॉप सोलर को सबसे बड़ा रोजगारदाता बताया गया है, जिसकी कुल संभावित नौकरियों में करीब 43 प्रतिशत हिस्सेदारी रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 6.5 लाख से अधिक नए रोजगार जुड़े हैं। इनमें सबसे बड़ा योगदान रूफटॉप सोलर सेक्टर का रहा, जिसने कुल रोजगार वृद्धि में 62 प्रतिशत हिस्सेदारी निभाई।
अध्ययन में बताया गया है कि रूफटॉप सोलर प्रति मेगावाट लगभग 45 रोजगार-वर्ष सृजित करता है, जबकि ग्राउंड-माउंटेड सोलर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की तुलना में इसकी रोजगार क्षमता कई गुना अधिक है। यही वजह है कि इसे भविष्य का सबसे बड़ा रोजगार क्षेत्र माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य तय समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरित ऊर्जा क्षेत्र न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।
हालांकि रिपोर्ट में महिलाओं की कम भागीदारी को चिंता का विषय बताया गया है। वर्तमान में सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्र के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 11 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों ने कहा है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा।
🔹 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 44 लाख से अधिक रोजगार की संभावना
🔹 रूफटॉप सोलर बनेगा सबसे बड़ा रोजगारदाता, 43% हिस्सेदारी का अनुमान
🔹 2022-23 से 2025-26 के बीच 6.5 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित
🔹 रूफटॉप सोलर की रोजगार क्षमता बड़े सौर प्रोजेक्ट्स से 44 गुना अधिक
🔹 स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 11%
🔹 कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर देने की जरूरत


















