
दशहरा केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। वहीं, कई परंपराओं में यह दिन मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है।
दशहरा हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और धर्म की ही होती है। रावण के दस सिर अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य बुराइयों का प्रतीक माने जाते हैं। इस दिन रावण दहन के माध्यम से हम अपने भीतर की नकारात्मकता को समाप्त करने और अच्छे विचारों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
आइए, इस दशहरे पर केवल रावण का पुतला ही नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या, क्रोध और अन्य बुराइयों का भी अंत करें।
आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।



















