
सीबीआई जांच की मंजूरी के बाद भी चोरी जारी रहने का आरोप, विधायक रिकेश सेन की सूचना पर पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
भिलाई नगर। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से कथित लोहा चोरी का मामला एक बार फिर सामने आया है। भिलाई के छावनी क्षेत्र में लोहा काटे जाने की सूचना मिलने पर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद दुर्ग पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। बताया गया है कि पांडेय कबाड़ी के गोदाम में बड़ी मात्रा में लोहा और काटकर अलग किए गए लोहे के टुकड़े मिले हैं।
विधायक रिकेश सेन के मुताबिक, मामले की जानकारी मिलने के बाद उनकी टीम ने छावनी स्थित गोदाम पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद दुर्ग पुलिस को सूचना दी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौके पर जब्ती की कार्रवाई की जा रही थी। हालांकि, बरामद लोहे की वास्तविक मात्रा और उसके BSP से संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सीबीआई जांच की मंजूरी के बाद भी चोरी का आरोप
BSP से कथित लोहा चोरी के मामले में विधायक रिकेश सेन लंबे समय से जांच की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच को मंजूरी दी है और इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना भी प्रकाशित की गई है। इसके बावजूद चोरी की घटनाएं जारी रहने का आरोप लगाया जा रहा है।
विधायक ने सीआईएसएफ के डीआईजी और दुर्ग एसपी से चर्चा कर कथित लोहा चोरी पर रोक लगाने के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
धर्मकांटा से निकलने के बाद लोहा काटने की आशंका
विधायक रिकेश सेन ने आशंका जताई कि कथित तौर पर लोहा धर्मकांटा से निकलने के बाद रास्ते में रोका जाता है, फिर उसे काटकर अलग-अलग हिस्सों में रखा जाता है और इसके बाद गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। उनके अनुसार, ताजा सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर पुलिस को जानकारी दी।
हालांकि, लोहे का स्रोत, परिवहन से जुड़े दस्तावेज और इस मामले में संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी।
संगठित नेटवर्क की भूमिका की जांच की मांग
विधायक ने आरोप लगाया कि BSP से कथित लोहा चोरी के कारण राष्ट्रीय संपत्ति को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने नुकसान की राशि हजारों करोड़ रुपये तक होने का दावा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि जांच केवल चोरी का माल बरामद करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कथित तौर पर लोहा किन रास्तों से बाहर निकाला गया, उसे किन लोगों ने खरीदा और इस गतिविधि में किन लोगों की भूमिका रही।
अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप
रिकेश सेन ने आरोप लगाया कि BSP, पुलिस या केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इस तरह की गतिविधियां संभव नहीं हो सकतीं। उन्होंने ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
पुलिस की कार्रवाई से खुल सकते हैं अहम सुराग
छावनी क्षेत्र में पांडेय कबाड़ी के गोदाम पर हुई कार्रवाई के दौरान मिले लोहे की पहचान, उसके स्रोत और परिवहन संबंधी दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे कथित चोरी के नेटवर्क और माल की खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।
अब सीबीआई जांच की प्रक्रिया और दुर्ग पुलिस की कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं। मामले में आगे की जांच से ही स्पष्ट होगा कि बरामद लोहा BSP का है या नहीं और कथित चोरी में किन लोगों की भूमिका रही है।















