
नासिक TCS BPO केस: ‘मेरा नाम हानिया रखा, हिजाब पहनाया’, धर्म परिवर्तन के दबाव और यौन शोषण मामले में जांच तेज
मुंबई/नासिक: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) BPO से जुड़े कथित यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के मामले में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मियों पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और इस्लाम कबूल करने के लिए भारी दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रहा है।
मुख्य आरोपी निदा खान पर गंभीर आरोप
देवलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, मुख्य आरोपियों में से एक निदा खान ने पीड़िता पर धर्म बदलने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में जो दलीलें दी हैं, उसके अनुसार:
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पहचान बदलने की कोशिश: निदा खान ने कथित तौर पर पीड़िता का नाम बदलकर “हानिया” रख दिया था।
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धार्मिक प्रशिक्षण: पीड़िता को उसके ही घर पर नमाज पढ़ने और हिजाब पहनने की ट्रेनिंग दी गई।
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डिजिटल दबाव: खान ने पीड़िता के मोबाइल फोन में जबरन इस्लामिक एप्लिकेशन इंस्टॉल कर दिए और लगातार धार्मिक सामग्री (content) भेजती थी।
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लालच और धमकी: धर्म परिवर्तन के लिए राजी करने के लिए पीड़िता को मलेशिया में नौकरी दिलाने का लालच दिया गया। साथ ही यह धमकी भी दी गई कि यदि उसने इस्लाम नहीं कबूला, तो उसके परिवार पर भयानक विपत्ति आ जाएगी।
यौन शोषण और प्रताड़ना के अन्य आरोपी
शिकायतकर्ता ने अपने दो अन्य सहकर्मियों पर भी संगीन आरोप लगाए हैं:
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दानिश शेख: आरोप है कि दानिश ने शादी का झांसा देकर पीड़िता का यौन शोषण किया।
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तौसीफ अत्तार: इस आरोपी पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) का आरोप लगाया गया है।
SC/ST एक्ट लागू और अदालत में सुनवाई
चूंकि शिकायतकर्ता महिला अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से ताल्लुक रखती है, इसलिए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ SC/ST एक्ट की सख्त धाराएं भी जोड़ दी हैं।
सोमवार को नासिक कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के.जी. जोशी की बेंच के सामने ‘इन-कैमरा’ सुनवाई हुई। विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने फरार आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि मामले में कई अहम सुराग मिले हैं, जिसके लिए खान से हिरासत में पूछताछ करना बेहद जरूरी है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निदा खान की अग्रिम जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो 2 मई को सुनाया जा सकता है। फिलहाल निदा खान को गिरफ्तारी से कोई राहत नहीं मिली है।
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