हुआ क्या है, भूपेश का सुर क्यों बदल गया..

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भूपेश बघेल कांग्रेस के बड़े नेता है, वह किसी विषय में कुछ कहते हैं तो वह कांग्रेस की राय मानी जाती है। माना जाता है कि भूपेश बघेल को कांग्रेस की रीति-नीति की पूरी जानकारी है। वह जो कुछ कहते हैं, पार्टी लाइन के आधार पर ही कहते हैं। वह जो कहते हैं, उस पर कायम रहते हैं, एक बार जो कह दिया, उस पर उनका सुर नहीं बदलता है। बस्तर में २०० से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया तो भूपेश बघेल जो कहा था, पहली बार ऐसा हुआ है कि भूपेश बघेल ने सरेंडर पर कुछ कहा और उसके बाद उनका सुर बदल गया है, इससे राज्य में इस बात की चर्चा है कि हुआ क्या है जो बस्तर में नक्सल उन्मूलन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण जाहिर करने वाले भूपेश बघेल का सुर बाद के दिनों में बदल गया है।

 

 

 

२०० से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया था तो भूपेश बघेल ने इसके लिए सरकार को बधाई दी थी।खुशी जाहिर की थी कि और कहा था कि आज बस्तर में बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर से हमे संतोष है कि देश की यह लड़ाई जल्द खत्म होगी। हम सब मिलकर जीतेंगे। तब वनमंत्री केदार कश्यप ने सही सवाल उठाया था कि यह आपकी निजी राय है या कांग्रेस का अधिकृत बयान क्योंकि तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का इस मामले में सुर भूपेश बघेल से अलग था।

 

 

 

दीपक बैज ने २०० से ज्यादा नक्सलियों के सरेंडर को इवेंट बताया था,उन्होंने ऐसी कोई आशा व्यक्त नहीं की थी कि बस्तर से नक्सली समस्या समाप्त होने वाली है। उन्होंने नक्सलियों के सरेंडर का श्रेय कांग्रेस सरकार काे दिया था। नक्सिलयों के सरेंडर का श्रेय भूपेश बघेल ने भी दिया था लेकिन उनका बयान शतप्रतिशत पार्टी लाइन का न होने के कारण ही बाद में उनको जो कुछ कहा वह पहले बयान से अलग लगता है, ऐसा लगता है कि नक्सली सरेंडर पर भूपेश बघेल का सुर बदल गया है।यानी दीपक बैज ने कहा उसे ठीक माना गया और भूपेश बघेल ने जो कहा उसे ठीक नहीं माना गया।पीएम मोदी ने अपने बयान में देश व बस्तर में नक्सलवाद के लिए कांग्रेस को दोषी बताया तो भूपेश बघेल ने पीएम मोदी के बयान की आलाेचना करते कहना पड़ा कि बस्तर में नक्सलवाद कमजोर पड़ा है तो कांग्रेस सरकार की नीति के कारण।उन्होंने पीएम को याद दिलाया कि नक्सलवाद की सबसे ज्यादा कीमत तो कांग्रेस ने चुकाई है।

 

 

 

इसके बाद फिर भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की नक्सल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नक्सलवाद को खत्म करने के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा कोई नई नहीं है, पिछले कई सालों से की जा रही है लेकिन नक्सलवाद ज्यों का त्यों बना हुआ है।नक्सली दूसरे प्रदेशों मेें क्यों सरेंडर कर रहे हैं,छत्तीसगढ़ मे सरेंडर क्यों नहीं कर रहे हैं। ये वही भूपेश बघेल हैं जो २०० से ज्यादा नक्सलियों के सरेंडर पर खुशी जाहिर की थी और उम्मीद की थी कि नक्सलियो का खात्मा होगा अब वही भूपेश बघेल कह रहे हैं कि नक्सली समस्या तो बनी रहेगी। नक्सली सरेंडर नहीं कर रहे हैं। माना जाता है कि भूपेश बघेल ने नक्सलियों के सरेंडर पर जो खुशी जाहिर की थी, नक्सलियों के खत्म होने की जो उम्मीद जाहिर उसे पार्टी आलाकमान ने पसंद नहीं किया है. यही वजह है कि वह अब वह सब कह रहे हैं जो पहले कहा करते थे। उनका सुर पहले जैसा हो गया है।

 

 

 

भूपेश बघेल के बयान पर सीएम साय ने कहा है कि सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ ठाेस कार्रवाई की है।कांग्रेस सरकार के समय तो सबसे ज्यादा ७० फीसदी नक्सली छत्तीसगढ़ में थे।अगर कांग्रेस सरकार ईमानदारी से प्रयास करती तो नक्सलवाद की समस्या पहले ही खत्म हो गई होती। सीएम साय का सीधा कहना है कि आज छत्तीसगढ़ में नक्सली बचे हैं तो वह कांग्रेस के कारण बचे हुए हैं। जो काम हम दो साल में करने में सफल रहे हैं, वही काम कांग्रेस पांच साल का समय मिलने पर भी नहीं कर पाई है। इससे साफ है कि उनकी नीति व नीयत नक्सलियों के सफाए की थी ही नहीं। वह मानते नहीं थे छत्तीसगढ़ से नक्सलियों के सफाया हो सकता है,यही वजह है कि वह आज भी मानते हैं कि बस्तर से नक्सलियों का सफाया नही हो सकता।बस्तर में नक्सली बचे रहेंगे। बस्तर से नक्सलवाद का सफाया नहीं हो सकता।

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