
रायपुर। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव, संभावित वर्षा, तेज हवाओं और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए रायपुर कलेक्टर एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा 29 अक्टूबर 2026 को जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य संबंधित शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय अवकाश घोषित किया गया है। विद्यार्थियों की सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया यह निर्णय सराहनीय है, लेकिन आदेश के दायरे को लेकर एक अहम सवाल भी उठ रहा है—जब मौसम विद्यार्थियों के लिए जोखिमपूर्ण है, तो क्या शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा का प्रश्न उतना ही महत्वपूर्ण नहीं है?
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का उल्लेख करते हुए 29 अक्टूबर को विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया गया है। आदेश में जिले के समस्त शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य संबंधित शैक्षणिक संस्थानों का उल्लेख है। हालांकि, आदेश में अवकाश को स्पष्ट रूप से विद्यार्थियों तक सीमित रखा गया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संस्थानों के शिक्षक, प्राध्यापक, लिपिकीय कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और अन्य स्टाफ को भी इस अवकाश का लाभ मिलेगा या उन्हें नियमित रूप से संस्थान पहुंचना होगा?
विद्यार्थियों की सुरक्षा जरूरी, तो शिक्षकों की क्यों नहीं?
प्रतिकूल मौसम में विद्यार्थियों को घर पर सुरक्षित रहने का अवसर देना प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। लेकिन विद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी उसी मौसम, उन्हीं सड़कों और उन्हीं परिस्थितियों का सामना करते हैं। विशेषकर दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कर्मचारियों के लिए तेज हवाओं और संभावित बारिश के बीच आवागमन जोखिमपूर्ण हो सकता है।
ऐसे में सवाल केवल अवकाश का नहीं, बल्कि समान रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करने का है। यदि मौसम की परिस्थितियां विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं, तो संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए। आखिरकार, शिक्षक और कर्मचारी भी परिवारों का हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
क्या शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भी लागू है अवकाश?
जारी आदेश के शब्दों के अनुसार अवकाश विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए घोषित किया गया है। इसमें शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों के लिए अवकाश या संस्थान में उपस्थिति को लेकर अलग से स्पष्ट निर्देश दिखाई नहीं देते। इसलिए यह मान लेना उचित नहीं होगा कि सभी कर्मचारियों को स्वतः अवकाश मिल गया है। इस संबंध में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित संस्थानों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
यदि विद्यार्थियों के लिए संस्थान बंद हैं, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को संस्थान बुलाने की आवश्यकता है या नहीं। साथ ही, यदि किसी कर्मचारी को प्रतिकूल मौसम के कारण आवागमन में कठिनाई होती है, तो उसके लिए क्या व्यवस्था होगी? इन प्रश्नों पर स्पष्टता प्रशासनिक निर्णय को अधिक व्यावहारिक और मानवीय बना सकती है।
सुरक्षा के लिए स्पष्ट निर्देश जरूरी
आपदा प्रबंधन का मूल उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे समय में प्रशासन द्वारा जारी आदेशों में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि सुरक्षा संबंधी निर्णय किन-किन वर्गों पर लागू होंगे। विद्यार्थियों के हित में अवकाश घोषित करना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन शिक्षकों, प्राध्यापकों और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों के संबंध में भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर हैं कि वे इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं। प्रश्न कलेक्टर के निर्णय का विरोध करने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि प्रतिकूल मौसम में सुरक्षा का अधिकार विद्यार्थियों तक सीमित न रह जाए। विद्यार्थियों के साथ-साथ उन्हें शिक्षा देने वाले शिक्षकों और संस्थानों को संचालित करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए।



















