काव्य संध्या ‘मुसाफ़िर हो तुम भी मुसाफ़िर हैं हम भी’ का सफल आयोजन

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काव्य संध्या ‘मुसाफ़िर हो तुम भी मुसाफ़िर हैं हम भी’ का सफल आयोजन

रायपुर-नवरंग काव्य मंच द्वारा दि. 27 जून शनिवार को वृन्दावन हॉल, सिविल लाइंस, रायपुर में प्रख्यात शायर डॉ बशीर बद्र की स्मृति में आयोजित काव्य संध्या ‘मुसाफ़िर हो तुम भी मुसाफ़िर हैं हम भी’ का कार्यक्रम बेहद सफल रहा। लोकप्रिय कवि राजेश जैन राही ने डॉ बशीर बद्र की प्रसिद्ध ग़ज़लों से बेहद दिलकश अंदाज़ में मंच संचालन किया।

  • कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जीईसी रायपुर विज्ञान एवं मानविकी विभागाध्यक्ष डॉ श्वेता चौबे थीं।

  • वरिष्ठ साहित्यकार डॉ माणिक विश्वकर्मा नवरंग ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की

  • महासमुंद से पधारे लोकप्रिय शायर श्री अशोक शर्मा, एम राजीव (युवा), अजीत जैन विशिष्ट अतिथि थे।

डॉ सीमा श्रीवास्तव ने डॉ बशीर बद्र की जीवनी एवं साहित्यिक अवदान प्रस्तुत किया।

जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है,
आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया,
जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया।

जैसे शेरों से महफ़िल गूँजती रही।

सम्माननीय मंच ने भी अपनी कविताओं का पाठ किया, मुख्य अतिथि जीईसी रायपुर विज्ञान एवं मानविकी विभागाध्यक्ष डॉ श्वेता चौबे ने अपने वक्तव्य में बद्र साहब के लेखनी पर अपने विचार रखे और अपनी कविताओं का पाठ किया, जिसमें उन्होंने “अकेले ही” कविता का पाठ करके ख़ूब वाहवाही बटोरी। 

जिसमें लोकप्रिय शायर श्री अशोक शर्मा ने बद्र साहब से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए अपनी ग़ज़लें पढ़ीं, और सबको मन्त्रमुग्ध कर दिया।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ माणिक विश्वकर्मा नवरंग ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए, बद्र साहब की रचनाओं का मर्म सबके सम्मुख रखा। और अपनी ग़ज़लों से सबका दिल जीत लिया।

उपस्थित रचनाकारों सर्व श्री आर. डी. अहिरवार, सुरेश तिवारी, सुरेंद्र रावल, नर्मदा प्रसाद तृण, छबिलाल सोनी, कोमल प्रसाद राठौर, शिव शंकर गुप्ता, राजेंद्र ओझा, श्री मन्नू लाल यदु, आरव शुक्ला, हर्ष व्यास, ईशान शर्मा, भागीरथ वर्मा मज़दूर, श्रीमती सुषमा पटेल, डॉ मृणालिका ओझा, श्री गोपाल सोलंकी, शशांक खरे, यशवंत यदु और आशीष ठाकुर ‘अकेला’ ने अपने काव्य पाठ से समां बाँध दिया।

 

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