दुर्ग में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, फीस लूट और जबरन खरीदारी की होगी जांच

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दुर्ग में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, फीस लूट और जबरन खरीदारी की होगी जांच

दुर्ग-दुर्ग जिले में निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ोतरी और किताब-यूनिफॉर्म के नाम पर पालकों पर डाले जा रहे आर्थिक बोझ को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने जिला और विकासखंड स्तर पर विशेष जांच समितियों का गठन किया है, जो निजी स्कूलों की फीस संरचना और खरीद व्यवस्था की जांच करेंगी।

जिले के कई पालकों ने शिकायत की थी कि कुछ निजी स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों के अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसके अलावा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाकर पालकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाला जा रहा है। शिकायतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन अब कार्रवाई के मूड में नजर आ रहा है।

जिला स्तरीय जांच समिति में कलेक्टर अभिजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा तथा वाणिज्यिक कर विभाग की सहायक आयुक्त रिंकी अखिलेश सोनी को शामिल किया गया है। यह समिति जिलेभर के निजी स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखेगी और शिकायतों की जांच करेगी।

इसके अलावा दुर्ग, धमधा और पाटन विकासखंडों में अलग-अलग जांच दल गठित किए गए हैं। इन समितियों में संबंधित एसडीएम, बीईओ और जीएसटी विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच दल फीस वृद्धि, अनिवार्य खरीदारी और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर जांच करेंगे।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में किसी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया गया तो “छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020” के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पालकों की सुविधा के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हेल्प डेस्क भी बनाया गया है। अभिभावक अपनी शिकायतें आवश्यक दस्तावेजों के साथ हेल्प डेस्क सह व्हाट्सएप नंबर 9109277888 पर दर्ज करा सकते हैं। शिकायत प्राप्त होने पर पालकों को पावती भी दी जाएगी।

प्रशासन की इस कार्रवाई से पालकों में राहत की उम्मीद जगी है। लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी और लगातार बढ़ती फीस को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई थी। अब जांच समितियों के गठन के बाद यह माना जा रहा है कि स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लग सकता है।

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