पीएम जनमन आवास योजना में ठगी का आरोप, ठेकेदार शेख निजामुद्दिन के खिलाफ एफआईआर दर्ज

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बोड़ला। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत मकान निर्माण के नाम पर हितग्राहियों से पैसे लेने और निर्माण कार्य पूरा नहीं करने के मामले में ठेकेदार शेख निजामुद्दिन उर्फ निक्की खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि ठेकेदार ने तीन हितग्राहियों से कुल 2 लाख 40 हजार रुपये लिए, लेकिन उनके आवास का निर्माण पूरा नहीं कराया और रकम भी वापस नहीं की।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के हितग्राहियों के साथ धोखाधड़ी करने और उनकी राशि का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी योजना के तहत आवास निर्माण में अनियमितताओं को लेकर दो ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

तीन हितग्राहियों से 2.40 लाख रुपये लेने का आरोप

मामला बोड़ला विकासखंड के ग्राम दुलदुला और ग्राम पंचायत बेंदा का है। जानकारी के अनुसार, हितग्राही राजिम धुर्वे, उनके बड़े भाई सोनेलाल धुर्वे और पड़ोसी छिरवैया धुर्वे के नाम पर प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुए थे।

आरोप है कि ठेकेदार शेख निजामुद्दिन उर्फ निक्की खान ने आवास निर्माण का काम लिया। हितग्राहियों को पहली किस्त के रूप में 40-40 हजार रुपये और दूसरी किस्त के रूप में 60-60 हजार रुपये मिलने के बाद राशि ठेकेदार को दी गई। शिकायत के मुताबिक, तीनों हितग्राहियों से 80-80 हजार रुपये लेकर भी आवास निर्माण पूरा नहीं किया गया। पैसे वापस मांगने पर भी रकम नहीं लौटाई गई।

चिल्फी थाने में दर्ज हुई एफआईआर

हितग्राही की शिकायत पर चिल्फी थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी।

तीन ठेकेदारों पर 7.49 लाख रुपये की ठगी का आरोप

प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत निर्माण कार्य पूरा नहीं करने और हितग्राहियों की रकम वापस नहीं करने के मामलों में अब तक तीन ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

शेख निजामुद्दिन उर्फ निक्की खान के खिलाफ चिल्फी थाने में शिकायत।

तुमेश गोड़ के खिलाफ ग्राम आमानारा के बैसाखू बैगा की शिकायत पर तरेगांव जंगल थाने में मामला दर्ज।

कुमार मेरावी के खिलाफ ग्राम राजाढ़ार के देवसिंह की शिकायत पर चिल्फी थाने में एफआईआर दर्ज।

इन तीनों मामलों में कुल 7 लाख 49 हजार रुपये की कथित ठगी का आरोप लगाया गया है। प्रशासन की ओर से योजना के हितग्राहियों के अधिकारों की रक्षा और आवास निर्माण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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