“भरत-मिलाप का मंचन”: मर्यादा, प्रेम और त्याग की अमर गाथा

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रायपुर — भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है। इसी ग्रंथ का एक अद्भुत प्रसंग, “भरत मिलाप”, श्री जेतूसाव मठ, पुरानी बस्ती, रायपुर में सजीव रूप में मंचित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन “संस्कार भारती” द्वारा किया गया है, जिसमें कई प्रमुख अतिथि गण उपस्थित रहेंगे।

भरत मिलाप: जब भ्रातृ प्रेम बना आदर्श

भरत मिलाप उस महान क्षण का चित्रण है जब भगवान श्रीराम के वनवास के बाद उनके अनुज भरत उनसे मिलने चित्रकूट जाते हैं। अयोध्या लौटने से इंकार करते हुए राम जब वनवास पूरा करने की बात पर अड़े रहते हैं, तो भरत उनके खड़ाऊं (चरण पादुका) लेकर लौटते हैं और उन्हें राजगद्दी पर विराजमान करते हैं। यह दृश्य भारतीय इतिहास का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण बन गया।

यह नाट्य मंचन केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय मूल्यों—त्याग, निष्ठा और धर्म—का जीवंत उदाहरण है। वाल्मीकि और तुलसीदास जैसे महाकवियों ने जिन प्रसंगों को कलमबद्ध किया, वही कथा जनमानस के हृदय में फिर से जीवंत हो उठेगी।

कार्यक्रम शाम 5 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें मुख्य अतिथि श्री महंत राम सुन्दर दास जी, श्री सुनील सोनी (विधायक), श्री रमेश सिंह ठाकुर (भा.ज.पा. जिला अध्यक्ष), श्री महेन्द्र अग्रवाल (सचिव) और श्री अजय तिवारी (ट्रस्टी, श्री जेतूसाव मठ) की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

इस पावन अवसर पर संयोजन राकेश सिंह ठाकुर और नाट्य मंचन किशोर वैभव जयसवाल  एवं समूह द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल संस्कृति का संरक्षण करना है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ना भी है।

“भरत मिलाप” का यह मंचन दर्शकों को न केवल भावविभोर करेगा, बल्कि उन्हें यह भी सिखाएगा कि सच्चा नेतृत्व त्याग और सेवा से उपजता है, सत्ता की लालसा से नहीं।

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