
सीजीआईटी रायपुर में छह दिवसीय एआईसीटीई–अटल फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ
एआई और सौर ऊर्जा से बनेगा स्मार्ट ऊर्जा भविष्य
रायपुर। ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं सौर ऊर्जा के एकीकरण पर केंद्रित छह दिवसीय एआईसीटीई–अटल फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ 7 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीजीआईटी), रायपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम का विषय “Artificial Intelligence Integrated Solar Energy Systems for Smart and Sustainable Power Generation” रखा गया है।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को सौर ऊर्जा प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन तथा आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग से परिचित कराना है। छह दिनों तक चलने वाले इस फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों के साथ अपने तकनीकी अनुभव, शोध कार्य तथा औद्योगिक क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीन तकनीकों को साझा करेंगे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. अभिताब दुबे, अतिरिक्त संचालक, तकनीकी शिक्षा संचालनालय, छत्तीसगढ़ तथा संरक्षक डॉ. प्रो. एम. आर. खान, प्राचार्य, सीजीआईटी रायपुर की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी डॉ. अजय त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा निभाई जा रही है।
कार्यक्रम के प्रथम दिन सौर ऊर्जा विशेषज्ञ इंजी. शैलेन्द्र कुमार शुक्ल, जो विद्युत मंडल के पूर्व चेयरमैन, क्रेडा के पूर्व अध्यक्ष तथा वर्तमान में ईआईकॉन सोलर कंपनी के मालिक हैं, ने सौर पीवी प्रणालियों की वर्तमान औद्योगिक स्थिति, तकनीकी विकास एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों, फोटोवोल्टिक तकनीक की बढ़ती उपयोगिता तथा भविष्य में स्मार्ट सौर ऊर्जा प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऊर्जा की बढ़ती मांग, पर्यावरण संरक्षण तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए सौर ऊर्जा आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके पश्चात प्रतिभागियों के लिए सौर ऊर्जा से संबंधित शोध-पत्र चर्चा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न शोध विषयों पर प्रतिभागियों ने विचार-विमर्श किया। इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को नवीनतम शोध प्रवृत्तियों, शोध पद्धतियों तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में संभावित अनुसंधान विषयों की जानकारी प्राप्त हुई।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. आर. एन. पटेल, प्रोफेसर, एनआईटी रायपुर ने घरेलू सौर पीवी संयंत्रों के बीच स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन एवं विद्युत साझाकरण विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से घरेलू स्तर पर उत्पादित सौर ऊर्जा का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने ऊर्जा उत्पादन, खपत, भंडारण एवं विद्युत साझाकरण को स्मार्ट तकनीकों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के प्रथम दिन के अंत में प्रतिभागियों के लिए प्रायोगिक एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को सौर ऊर्जा प्रणालियों के व्यावहारिक पहलुओं तथा स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन से संबंधित तकनीकों को समझने का अवसर मिला।

आयोजकों के अनुसार, वर्तमान समय में सौर ऊर्जा प्रणालियों में केवल विद्युत उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऊर्जा उत्पादन एवं मांग का पूर्वानुमान, सिस्टम की निगरानी, फॉल्ट डिटेक्शन, अधिकतम विद्युत उत्पादन, ऊर्जा भंडारण तथा ग्रिड के साथ प्रभावी समन्वय भी आवश्यक हो गया है। इन सभी क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एआई आधारित प्रणालियां मौसम, सौर विकिरण और ऊर्जा मांग जैसे विभिन्न आंकड़ों का विश्लेषण कर सौर विद्युत उत्पादन का पूर्वानुमान लगाने तथा ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती हैं।
छह दिवसीय इस कार्यक्रम में सौर फोटोवोल्टिक प्रणालियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण, सौर ऊर्जा पूर्वानुमान, स्मार्ट ग्रिड तथा सौर ऊर्जा प्रणालियों के व्यावहारिक एवं औद्योगिक अनुप्रयोगों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रतिभागियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण, शोध-पत्र चर्चा एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर भी मिलेगा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ताओं की समृद्ध सहभागिता
इस Faculty Development Programme में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनके अनुभव और विशेषज्ञता से प्रतिभागियों को सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा दक्षता, तकनीकी नवाचार तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक एवं व्यावहारिक जानकारी प्राप्त होगी।
🔹 श्री शैलेन्द्र कुमार शुक्ला
Chairman, ICON Solar Panel, Raipur
ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ, तकनीकीविद् एवं कॉर्पोरेट लीडर इंजीनियर शैलेन्द्र कुमार शुक्ला के पास पावर जनरेशन, ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन, रिन्यूएबल एनर्जी, सोलर मैन्युफैक्चरिंग, बायोफ्यूल, इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉर्पोरेट गवर्नेंस का 44 वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव है। वे Western Regional Power Committee के Chairman तथा Chhattisgarh State Power Holding Company के Chairman & Managing Director सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे सोलर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र से जुड़े अनेक संगठनों का नेतृत्व कर रहे हैं और Borosil Renewables के Independent Director भी हैं। उन्हें MIT सहित IITs एवं IIMs जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में व्याख्यान देने का अनुभव है।
🔹 डॉ. आर. एन. पटेल
Associate Professor, National Institute of Technology, Raipur
विद्युत अभियांत्रिकी के क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता डॉ. आर. एन. पटेल Power Systems में Ph.D. तथा IIT Delhi से M.Tech. हैं। दो दशक से अधिक के अकादमिक अनुभव के दौरान वे BITS Pilani, IIT Roorkee, SSTC Bhilai और CSVTU Bhilai जैसे संस्थानों में महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्व निभा चुके हैं। IEEE के Senior Member डॉ. पटेल ने Chhattisgarh के पहले MSME-supported Business Incubator की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रमुख शोध क्षेत्र DC Microgrids, Renewable Energy Integration, Power Systems में Artificial Intelligence Applications और Optimisation हैं। उन्होंने 21 PhD शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है तथा अनेक शोध-पत्र, पेटेंट और तकनीकी प्रकाशन उनके नाम हैं।
🔹 डॉ. राजीव ग्यानी
Retd. Superintending Engineer, CREDA, Raipur
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 37 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले डॉ. राजीव ग्यानी सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, ग्रामीण विद्युतीकरण एवं सतत अवसंरचना के विशेषज्ञ हैं। वे Chhattisgarh Renewable Energy Development Agency (CREDA) में Superintending Engineer के रूप में कार्य करते हुए विकेन्द्रीकृत हरित ऊर्जा एवं ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के नियोजन और क्रियान्वयन से जुड़े रहे। International Solar Alliance में Additional Director के रूप में उन्होंने बहु-देशीय सौर ऊर्जा एवं Energy Access Programmes का नेतृत्व किया। 24 देशों में रणनीतिक एवं तकनीकी अनुभव रखने वाले डॉ. ग्यानी कार्यक्रम में नवीकरणीय ऊर्जा और सौर परियोजनाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा करेंगे।
🔹 श्री अरविंद रस्तोगी
CEO, Technovations, Bhilai
Chartered Engineer एवं Certified Energy Auditor श्री अरविंद रस्तोगी के पास चार दशकों से अधिक का तकनीकी एवं उद्यमिता अनुभव है। Mechanical Engineering में BE, MBA तथा Environment & Sustainable Development एवं Climate Change में postgraduate qualifications रखने वाले श्री रस्तोगी Industrial Process Control, Fire-Gas Detection/Suppression Systems, Building Management Systems तथा Energy Conservation Schemes के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में कार्य करने के बाद उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा। वे Fire & Security Association of India से भी महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे हैं और उन्हें IEI Engineering Achievement Award-2012 से सम्मानित किया जा चुका है।
🔹 डॉ. बालकृष्ण मेहता
Associate Professor, Indian Institute of Technology Bhilai
IIT Bhilai के Mechanical Engineering Department में Associate Professor डॉ. बालकृष्ण मेहता Fluids एवं Thermal Sciences के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने IIT Kanpur से M.Tech. एवं Ph.D. की है और Tata Motors Technical Centre में Manager तथा फ्रांस में ISAE-ENSMA Poitiers में Post-Doctoral Fellow के रूप में भी कार्य किया है। उनका शोध मुख्यतः thermo-hydrodynamics, evaporating thin liquid films, Pulsating Heat Pipes, Thermosyphons, Loop Heat Pipes तथा porous media में thermal एवं flow behaviour से संबंधित है। उनके शोध कार्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय journals तथा conferences में प्रकाशित हुए हैं।
🔹 डॉ. कीर्ति भूषण मिश्रा
Associate Professor, Indian Institute of Technology, Roorkee
IIT Roorkee के Mechanical and Industrial Engineering Department में Associate Professor डॉ. कीर्ति भूषण मिश्रा combustion, fire & explosion safety, alternative fuels, emission control तथा CFD modelling के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने जर्मनी के University of Duisburg-Essen से Combustion and Fire Safety में Ph.D. की है और Germany में एक दशक से अधिक का research एवं teaching experience प्राप्त किया है। वे BAM Federal Institute for Materials Research and Testing, Berlin में Senior Scientist (Post-Doc) रह चुके हैं। उनके नाम 21 patents, 37 international journal publications और 840 से अधिक citations हैं। उन्हें 2024 में Armament Research Board (DRDO) द्वारा Best Project Investigator का सम्मान भी प्राप्त हुआ।
🔹 डॉ. अजय त्रिपाठी
Professor & Head, Mechanical Engineering, Govt. Engineering College, Raipur
Government Engineering College, Sejbahar, Raipur के Mechanical Engineering Department के Professor एवं Head डॉ. अजय त्रिपाठी के पास 24 वर्षों से अधिक का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने IIT Delhi से Thermal Engineering में M.Tech. तथा MNNIT Allahabad से Mechanical Engineering में Ph.D. की है। वे TEQIP Coordinator, B.I.S. Nodal Officer, Dean R&D एवं Institute Research Cell के प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। उन्होंने लगभग 40 शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं, तीन पेटेंट उनके नाम हैं तथा उन्हें Gwalior Ratna Award-2015 for Engineering & Technology से सम्मानित किया गया है।
🔹 श्री हृदया मोहन
Former Executive Director, Bhilai Steel Plant (BSP), SAIL
Steel एवं manufacturing sector में 37 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले श्री हृदया मोहन Independent Consultant, Writer एवं Columnist हैं। Electrical Engineering graduate श्री मोहन ने SAIL के Bhilai Steel Plant में Executive Director (Materials Management) के रूप में कार्य किया तथा operations, procurement और international business से जुड़े वरिष्ठ दायित्व निभाए। वे छह वर्षों तक Beijing में China एवं Mongolia के Chief Representative भी रहे। Leadership Development एवं Professional Training के विशेषज्ञ श्री मोहन को Sir M. Visvesvaraya Gold Medal तथा SAIL के सर्वोच्च नेतृत्व सम्मान Jawahar Award से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे energy, steel, technology, sustainability एवं public policy जैसे विषयों पर लेखन और व्याख्यान के माध्यम से अपने अनुभव साझा करते हैं।
🔹 डॉ. अशोक जी. मतानी
Retd. Professor, Govt. College of Engineering, Jalgaon
Government College of Engineering, Jalgaon के सेवानिवृत्त Professor डॉ. अशोक जी. मतानी के पास academia, research, administration और industry को मिलाकर 33 वर्षों का व्यापक अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता Energy, Industrial Engineering, Environment, Artificial Intelligence एवं IoT Applications, Management तथा National Education Policy (NEP) में है। उन्होंने 100 research papers प्रकाशित किए हैं, 100 अन्य शोध-पत्र प्रतिष्ठित IITs, IIMs एवं NITs में प्रस्तुत किए हैं और तीन patents उनके नाम हैं। उन्हें 12 “Best Paper” Awards प्राप्त हुए हैं। वे तीन Ph.D. शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर चुके हैं तथा 60 keynote/invited talks और 160 FDP/STTP expert lectures दे चुके हैं।
इन सभी विशेषज्ञ वक्ताओं की बहुआयामी विशेषज्ञता से FDP में प्रतिभागियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ उद्योग, शोध और वास्तविक परियोजनाओं से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होंगे। विशेष रूप से Artificial Intelligence और Solar Energy के समन्वय पर केंद्रित यह विशेषज्ञ सहभागिता कार्यक्रम के विषय को तकनीकी एवं व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से समृद्ध बनाएगी।
कार्यक्रम के आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम शिक्षकों को नवीनतम तकनीकी ज्ञान से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अपने संस्थानों में एआई आधारित स्मार्ट एवं टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों पर शिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सक्षम बनाएंगे। इससे देश में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।





























