एमडीएम में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, चीफ सेक्रेट्री ने जारी किया खाद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल

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बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में शालेय छात्रों के मध्याह्न भोजन (MDM) की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त हो गया है। 21 अगस्त को सुकमा के पोटाकेबिन स्कूल में 426 बच्चों के खाने में फिनाइल मिलाने की घटना के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ी टिप्पणी की थी। इसी के मद्देनजर मुख्य सचिव ने प्रदेशभर के सभी कलेक्टरों, एसपी और अधिकारियों को विस्तृत खाद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल जारी किया है।

डिवीजन बेंच ने साफ किया है कि यदि छात्रों की सुरक्षा में लापरवाही हुई तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य माना जाएगा। अदालत ने 17 सितंबर को चीफ सेक्रेट्री से शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया है।

 

घटना की पृष्ठभूमि

21 अगस्त 2025 को सुकमा जिले के पाकेला आवासीय पोटाकेबिन स्कूल में भोजन में फिनाइल मिलाने का मामला सामने आया। 426 छात्रों के लिए बनी सब्ज़ी में गंध आने पर एक शिक्षक ने समय रहते इसे पहचान लिया, जिससे बड़ी त्रासदी टल गई। हाईकोर्ट ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि – “अगर यह घटना पकड़ी नहीं जाती तो पूरे 426 छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती थी।”

चीफ सेक्रेट्री के दिशा-निर्देश

मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कई कड़े निर्देश दिए हैं—

भोजन की जांच: परोसने से पहले रोजाना शिक्षक/वार्डन को भोजन चखकर प्रमाणन करना होगा।

रसोई और भंडारण स्वच्छता: फिनाइल, कीटनाशक, डिटर्जेंट जैसी रसायनिक वस्तुओं को खाने से पूरी तरह अलग रखा जाएगा।

चखने का रजिस्टर: शिक्षक और रसोइये द्वारा हस्ताक्षरित रजिस्टर रखना अनिवार्य।

निगरानी: हर जिले में खाद्य सुरक्षा की मॉनिटरिंग के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे।

सुरक्षा: आवासीय स्कूलों और बड़े छात्रावासों की रसोई व भोजन स्थलों में सीसीटीवी लगाने की सिफारिश।

चिकित्सा तैयारी: सभी स्कूलों और छात्रावासों में प्राथमिक चिकित्सा किट और आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क अनिवार्य।

आपराधिक कार्रवाई: जानबूझकर भोजन दूषित करने की स्थिति में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाएगी।

जवाबदेही: चूक की स्थिति में प्राचार्य, वार्डन और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधी जवाबदेही तय होगी।

समुदाय की भागीदारी: पालक-शिक्षक निगरानी समिति बनाई जाएगी और नियमित समीक्षा बैठकें होंगी।

नियमित ऑडिट: त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक स्तर पर स्वतंत्र खाद्य सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने कहा “बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। थोड़ी सी भी लापरवाही राज्य और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर शर्मिंदगी का कारण बनेगी।”

अब देखना होगा कि आगामी 17 सितंबर को मुख्य सचिव कोर्ट के समक्ष क्या रिपोर्ट पेश करते हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने अब तक कौन से ठोस कदम उठाए हैं।

 

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