बिहार में कांग्रेस ने गजब की पलटी मारी

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बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। एनडीए ने इसमें महागठबंधन से बाजी मारी और अपने साथियों के साथ बिहार की जनता को भी संदेश दिया कि हम गठबंधन की राजनीति करते हैं तो हमको गठबंधन धर्म निभाना भी आता है। वही महागठबंघन न तो सुनियोजित तरीके से राजनीतिक दलों के लिए प्रत्याशी तय कर पाया न ही यह तय कर पाया कि कौन सा राजनीतिक दल कितनी सीटों पर और कौन कौन सी सीटों पर चुनाव लडेगा। नामांकन के दिन तक यह फैसला नहीं हो पाया और महागठबंधन ने साबित कर दिया कि वह नाम का महागठबंधन है, उसे गठबंधन धर्म निभाना नहीं आता। महागठबंधन के सभी राजनीतिक दलों को गठबंधन से ज्यादा इस बात की चिंता रही कि वह कैसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं।

लालू परिवार को भ्रष्टाचार के मामले में समन जारी हुआ तो कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों ने इसे अपने लिए अच्छा मौका समझ कर ज्यादा सीटों पर मनमाने प्रत्याशी की घोषणा कर दी। यह करने के बाद सबको समझ में आया कि इससे तो महागठबंधन को ही नुकसान होगा तो कांग्रेस की तरफ से नुकसान को कम करने का प्रयास किया गया। उसने वरिष्ठ पर्यवेक्षक राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत को लालू परिवार के साथ बात करने के लिए भेजा। अशोक गहलोत ने एक दिन पहले लालू यादव परिवाार से बात की और दूसरे दिन उन्होंने घोषणा की है कि महागठबंधन का सीएम चेहरा तेजस्वी यादव होंगे और डिप्टी सीएम मुकेश सहनी होंगे।इसी के साथ अशोक गहलोत ने एनडीए को चुनौती दी है कि वह बताए कि उसका सीएम चेहरा कौन है। ऐसा करके अशोक गहलोत यह जताना चाह रहे हैं कि महागठबंधन में ऐसी एकजुटता है कि उसने चुनाव के पहले सीएम व डिप्टी सीएम चुन लिया है,यानी महागठबंधन चुनाव जीतता है तो तेजस्वी यादव सीएम होंगे और मुकेश सहनी डिप्टी सीएम होंगे।

यह कांग्रेस की गजब पलटी है। कौन नहीं जानता है कि राजद तो शुरू से कांग्रेस से अपेक्षा करता रहा है कि वह स्वीकार करे और घोषणा करे कि महागठबंधन का सीएम चेहरा तेजस्वी हैं। लेकिन कई कांग्रेस नेताओं सहित राहुल गांधी से पूछने पर भी उन्होंने कभी नहीं कहा कि महागठबंधन का सीएम चेहरा तेजस्वी यादव होंगे। वह यही कहते रहे कि चुनाव के बाद विधायक दल की बैठक में फैसला होगा कि बिहार का सीएम कौन होगा। कांग्रेस इसलिए तेजस्वी को सीएम का चेहरा घोषित नहीं करना चाहती थी कि उन पर भ्रष्टाचार का आरोप कोर्ट ने तय कर दिया है। इससे उनकी छवि साफसुथरी नेता की नहीं रह गई है, इससे गठबंधन को नुकसान हो सकता है। लालू यादव तो तेजस्वी को ही सीएम बनाने का सपना देखते रहे हैं, इसलिए वह इस बात पर अड़ गए कि कांग्रेस गठबंधन में रहकर चुनाव लड़ना चाहती है तो उसे ही यह घोषणा करना है कि महागठबंधन का सीएम चेहरा तेजस्वी होंगे। नहीं तो सब अलग अलग चुनाव लड़ो।

लालू यादव ने कांग्रेस को विवश कर दिया है कि वह तेजस्वी को अपना नेता माने और घोषित करे कि हम तेजस्वी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगे। राहुल गांधी ऐसा कर नहीं सकते थे क्योंकि उन्होने कभी तेजस्वी का सीएम चेहरा मानने को तैयार नहीं थे। इसलिए अशोक गहलोत के जरिए यह घोषणा करवा दी गई है कि तेजस्वी सीएम चेहरा होंगे। यह लालू परिवार की जीत है और कांग्रेस परिवार की हार है। कांग्रेस की हार यह तो है कि उसे तेजस्वी को सीएम के रूप में स्वीकार करना पड़ा है, उसकी और बड़ी हार यह है कि उसे मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम के रूप में स्वीकार करना पड़ा है क्योंकि तेजस्वी सीएम का चेहरा हो सकते हैं तो डिप्टी सीएम कांग्रेस को होना चाहिए था। लेकिन लगता है कि लालू परिवार ने कांग्रेस को डिप्टी सीएम का पद न देकर कांग्रेस को बता दिया है कि कांग्रेस का बिहार में कोई महत्व नहीं है, बिहार में लालू परिवार का ही महत्व है और लालू परिवार जो फैसला करता है, वही अंतिम है।

कांग्रेस के मन में क्या है।यह तो उसने अशोक गहलोत के जरिए बता दिया है लेकिन यह एक तरह से अंतिम नहीं है क्योंकि कांग्रेस चुनाव में ज्यादा सीटें जीतती हैं तो वह कह सकती है कि अशोक गहलोत ने जाे कहा था वह उस समय की स्थिति के हिसाब से कहा था। यह महागठबंधन के हित में लिया गया फैसला था। अगर महागठबंधन चुनाव हार जाता है तो भी इसका कलंक राहुल गांधी पर नहीं लगेगा कांग्रेस के पास कहने को बहाना होगा कि तेजस्वी को सीएम का चेहरा बनाने के कारण महागठबंधन चुनाव हार गया। महागठबंधन चुनाव हारता है तो इसका श्रेय तेजस्वी यादव काे ज्यादा और अशोक गहलोत पर कम जाएगा। अशोक गहलोत भी पल्ला झाड़कर कह सकते हैं कि उनको तो लालू परिवार ने मजबूर कर दिया था इसलिए उनको तेजस्वी को सीएम चेहरा घोषित करना पड़ा। अब तक बिहार में पलटी मारने के लिए नीतीश कुमार का नाम ही लिया जाता था और राहुल गांधी का नाम भी लिया जाएगा कि वह भी पलटी मारने में किसी से कम नही है।

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