बांकेबिहारी मंदिर का खजाना: 1971 की इन्वेंटरी की तलाश तेज, बैंक के बक्से में बंद है रहस्य

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मथुरा । बांकेबिहारी मंदिर के तोषखाने (खजाने) का रहस्य अब धीरे-धीरे खुलने की ओर बढ़ रहा है। वर्ष 1971 में तैयार की गई इन्वेंटरी (सूची) की तलाश शुरू हो गई है, जो उस समय मंदिर की कीमती वस्तुओं का ब्योरा रखती थी। हाईपावर्ड कमेटी ने 29 अक्टूबर को होने वाली बैठक में मंदिर के मैनेजर और सेवायत सदस्यों से इन्वेंटरी को लेकर जवाब तलब करने का निर्णय लिया है।

दरअसल, प्रशासन के आदेश पर धनतेरस के मौके पर सिविल जज जूनियर डिवीजन की अगुवाई में तोषखाना खोला गया, जहां दो दिन तक सर्च ऑपरेशन चला। इसमें सोने-चांदी की छड़ी, रत्न, चांदी का छत्र और कुछ पुराने बर्तन बरामद हुए। लेकिन कई सेवायतों ने सवाल उठाया कि “ ठाकुर जी का बाकी खजाना कहां गया?”

इतिहासकार प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी और सेवायत दिनेश गोस्वामी ने बताया कि 1971 में खजाने की आखिरी गिनती के बाद कुछ मूल्यवान वस्तुएं श्री बांकेबिहारी जी महाराज के नाम पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, मथुरा शाखा में एक बक्से में जमा कराई गई थीं। उस समय मुंसिफ कोर्ट ने पूरी इन्वेंटरी तैयार कर उसकी प्रतियां मंदिर प्रबंधन समिति को सौंपी थीं।

उस वक्त की कमेटी में अध्यक्ष प्यारेलाल गोयल और सदस्य कृष्णगोपाल गोस्वामी, दीनानाथ गोस्वामी, केवलकृष्ण गोस्वामी, रामशंकर गोस्वामी, शांतिचरण पिंडारा शामिल थे। तत्कालीन प्रशासक, मुंसिफ मथुरा, प्रबंधक कुंदनलाल चतुर्वेदी सहित सभी सदस्यों के पास इन्वेंटरी की प्रति थी।

अब हाईपावर्ड कमेटी ने तय किया है कि बैंक में रखे उस बक्से और इन्वेंटरी की खोज की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि मंदिर का असली खजाना कितना था और उसमें से क्या-क्या अब भी सुरक्षित है।

29 अक्टूबर की बैठक में इस रहस्यमय खजाने का एक और पन्ना खुल सकता है।

 

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