सूरजपुर । सूरजपुर जिले के भैंसामुंडा जंगल में बाघ के शिकार का मामला सामने आया है। मृत बाघ के शरीर से नाखून और दांत गायब पाए गए हैं। घटनास्थल के पास एक हथियार भी बरामद हुआ है, जिससे शिकार की आशंका जताई जा रही है। मामले की जांच के लिए वन विभाग की टीम जुट गई है।
जानकारी मिलते ही जिले के डीएफओ समेत आसपास के रेंज अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। हालांकि, वन विभाग फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बचता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि यह बाघ लंबे समय से इलाके में विचरण कर रहा था और इसकी जानकारी शिकारियों को पहले से थी।
खुलेआम बाघ के शिकार की घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाघ की मौजूदगी के बावजूद निगरानी में लापरवाही की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सूरजपुर वन मंडल के कुदरगढ़ रेंज में भी बाघ की गतिविधियां सामने आ चुकी हैं। बीते समय में बाघ ने दो गायों का शिकार किया था, जिससे आसपास के गांवों में दहशत फैल गई थी। करीब दो साल पहले इसी रेंज में बाघ के हमले में दो ग्रामीणों की मौत हुई थी। उस दौरान ग्रामीणों के हमले में बाघ घायल भी हुआ था, जिसे बाद में वन विभाग ने रेस्क्यू कर लगातार मॉनिटर किया था।
ताजा मामले में बताया गया है कि गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और कोरिया वनमंडल की सीमा पर मिले बाघ के शव का शनिवार को पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ 5 नवंबर से नदी किनारे मृत अवस्था में पड़ा था, लेकिन पहली नजर में वह सोया हुआ लग रहा था, इसलिए किसी को तत्काल शक नहीं हुआ।
बाघ के शिकार की इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। अब सभी की नजरें वन विभाग की जांच पर टिकी हैं कि इस दुर्लभ वन्यजीव का शिकार किसने और कैसे किया, और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
























