दुर्ग । शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त महामंत्री निकिता मिलिंद ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में जिस “सुशासन” का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वह अब “सूखा नशा आसन” बनकर रह गया है। दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में भाजपा से जुड़े किसान नेता विनायक ताम्रकार के लगभग 10 एकड़ खेत में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
निकिता मिलिंद ने कहा कि अफीम वही पौधा है जिससे आगे चलकर हेरोइन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थ तैयार होते हैं, और जिस नव्या मलिक का नाम प्रदेश में सूखे नशे की तस्करी से जोड़ा जाता रहा है, उसका नाम अचानक सरकारी सूची से गायब हो जाना संदेह को और गहरा करता है
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा से सीधा जवाब मांगते हुए पूछा कि आखिर इस अफीम की खेती में कौन-कौन मंत्री और अधिकारी शामिल हैं, नव्या मलिक का नाम सूची से किसने हटाया, वह कितनी बार और किन लोगों के साथ विदेश गई, विनायक ताम्रकार मुख्यमंत्री निवास में कब-कब पहुंचा और उसके किन-किन नेताओं व अधिकारियों से संबंध हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिस प्रकार से सत्ता से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं और बड़े नशा तस्करों के नाम सूची से गायब हो रहे हैं, उससे साफ लगता है कि प्रदेश में सूखे नशे का कारोबार राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को कानून व्यवस्था बिगड़ने के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
सीधा सवाल
निकिता मिलिंद ने यह भी कहा कि सबसे बड़ा सवाल दुर्ग जिले की पुलिस व्यवस्था पर खड़ा होता है। जब किसी छोटे से छोटे मामले में आरक्षक या थानेदार को तुरंत लाइन अटैच कर दिया जाता है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर चल रही अफीम की खेती आखिर पुलिस और प्रशासन की नजर से कैसे छिपी रही? क्या जिले के पुलिस कप्तान को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? अगर जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो क्या सरकार वही मापदंड पुलिस अधीक्षक पर भी लागू करेगी, जो आम पुलिसकर्मियों पर करती है? कांग्रेस ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती है तो इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए और बताए कि इतने बड़े नशे के कारोबार के दौरान आखिर प्रशासन और पुलिस क्या कर रही थी।
























