कविता: पुलिस
पुलिस है तो सुरक्षा है
पुलिस है तो बेफिक्री है।
हमें निश्चिंत रखने को
आसमां से यह उतरी है।
अलग पहचान की खातिर
खाकी वर्दी में संवरी है।
अंधेरे रात के हों या
उजाले हों दिवस के।
मन में रख भाव सेवा के
कदम संकल्प साहस के।
देश हित बढ़ते हैं निर्भय
लाखों ही दल पुलिस के।
सत्य और न्याय के दीपक
जलाकर बढ़ते जाते हैं।
गैरों के वास्ते सीनों पर
गोली खाया करते हैं।
अपना सुखचैन पुलिस वाले
समाज के हित में भुलाते हैं।
पुलिस के नाम पर जब तब
प्रश्न उठाना नहीं अच्छा।
ड्यूटी चौबीस घंटों की
सेवा काम भी है सच्चा।
उनकी पीड़ा को देख कर
अनदेखा करना नहीं अच्छा
नरम है दिल में ऐसे
मोम की तरहा पिघलते हैं
बाहर सख्त हैं ऐसे
जैसे लोहे में ढलते हैं।
पुलिस वाले अनुशासन संग
कठिन राहों में चलते हैं।
आओ मन से लगा कर ध्यान
समझ लें पुलिस का काम महान।
बडा है इसका योगदान।
बचाए सबका माल और जान ।
देश को है इस पर अभिमान
करें हम भी इसका सम्मान।

मौलिक रचना
लेखिका
उर्मिला देवी उर्मि
साहित्यकार, मंच संचालिका
रायपुर, छत्तीसगढ़
























